Floods in Masaurhi : मसौढ़ी में पुनपुन नदी का जलस्तर रविवार को 53.46 मीटर तक पहुंच गया. नदी अब अपने अब तक के सर्वाधिक जलस्तर 53.91 मीटर के रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच गयी है. 18 सितंबर 1976 को पुनपुन नदी का जलस्तर 53.91 मीटर दर्ज किया गया था. रविवार शाम चार बजे केंद्रीय जल आयोग के पुनपुन कार्यालय में जलस्तर 53.46 मीटर दर्ज किया गया, जो पुराने रिकॉर्ड से महज 45 सेंटीमीटर कम है.
हालांकि, नदी के जलस्तर बढ़ने की रफ्तार में कमी आयी है, लेकिन ओवरफ्लो होने के कारण बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ रहा है. शनिवार तक नदी तट और आसपास के इलाकों तक सीमित पानी रविवार को पकरी मोहल्ले से होते हुए पुनपुन बाजार के कुछ हिस्सों में प्रवेश कर गया.
चार घंटे में एक सेंटीमीटर बढ़ रहा जलस्तर
शनिवार को पुनपुन नदी का जलस्तर करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था. रविवार को इसकी रफ्तार घटकर करीब चार घंटे में एक सेंटीमीटर हो गयी. जलस्तर बढ़ने की गति धीमी होने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन नदी अभी भी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है.
पुनपुन नदी का खतरे का निशान 50.60 मीटर है. रविवार को नदी खतरे के निशान से 2.86 मीटर ऊपर बह रही थी.
पकरी मोहल्ले से बाजार तक पहुंचा पानी
नदी के ओवरफ्लो होने से रविवार को पानी पकरी मोहल्ले में फैल गया. इसके बाद पुनपुन बाजार के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया. नदी तट से बाजार की ओर शनिवार को पहुंचा पानी रविवार को और फैल गया. इससे नदी किनारे रहने वाले लोगों के साथ दुकानदारों की परेशानी भी बढ़ गयी है.
लक्ष्मण झूला पर आवागमन बंद
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर लक्ष्मण झूला को बैरिकेडिंग कर आम लोगों के लिए बंद कर दिया है. झूला तक जाने वाले पहुंच पथ पर भी बाढ़ का पानी पहुंच चुका है. प्रशासन ने लोगों से वहां नहीं जाने की अपील की है.
लगभग पूरा पुनपुन घाट डूबा
शनिवार तक पुनपुन नदी घाट का कुछ हिस्सा ही पानी में डूबा था, लेकिन रविवार को लगभग पूरा घाट पानी में समा गया. घाट पर एक से दो फीट तक पानी पहुंच गया है. नगर पंचायत और अनुमंडल प्रशासन की टीमें नदी घाट समेत अन्य संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी कर रही हैं. प्रमुख स्थानों पर प्रशासनिक टीमों को मुस्तैद रखा गया है.
