पटना विश्वविद्यालय की ओर से सोमवार को छात्र संघ के नवनिर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह हंगामे की भेंट चढ़ा. शपथ ग्रहण समारोह विश्वविद्यालय के जय प्रकाश नारायण अनुषद भवन में दोपहर 3:30 बजे आयोजित किया जाना था. लेकिन अध्यक्ष पद के उम्मीदवार रहे रिंकल यादव ने समारोह से पहले ही खुद को जय प्रकाश नारायण अनुषद भवन के अंदर बंद कर लिया और सभी गेट में ताला जड़ दिया. इसके बाद बार-बारी से सभी सेंट्रल पैनल के सभी पांच विजेता सदस्य अपने समर्थकों के साथ जुटने लगे और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित कराने को लेकर हंगामा तेज होता चला गया. दरअसल रिंकल यादव ने चुनाव के दौरान मतदाता पर्ची में रिंकल यादव की जगह रिंकल कुमार होने की गलती किसने की, इसकी जांच करने की मांग को लेकर शपथ ग्रहण समारोह को स्थगित करने की मांग करते रहे. उन्होंने विश्वविद्यालय पर आरोप लगाया कि साजिश के तहत मतदाता पर्ची में उनके नाम को गलत किया गया है. उनके समर्थकों ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालय यह नहीं बतायेगा कि इस गलती का दोषी कौन है किसके कहने पर यह गलती की गयी है यह नहीं बताया जाता है तो शपथ ग्रहण समारोह आयोजित नहीं होने दिया जायेगा.
पांच घंटे तक चलता रहा मान मनव्वल का सिलसिला
छात्र संघ के जीते हुए सदस्यों और उनके समर्थकों की भीड़ बढ़ने के साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आनन-फानन में पदाधिकारियों के बीच बैठक आयोजित की गयी लेकिन देर शाम तक विश्वविद्यालय प्रशासन कोई निर्णय नहीं ले सका. विश्वविद्यालय के डीन ने दोपहर तीन से शाम सात बजे के बीच तीन बार विरोध कर अध्यक्ष पद के उम्मीदवार रिंकल यादव की मान मनव्वल करते रहे लेकिन वे मानने को तैयार नहीं हुए. इधर छात्र संघ के जीते हुए सदस्यों ने शपथ ग्रहण समारोह आयोजित कराने को लेकर कुलपति से मिलने को लेकर विश्वविद्यालय मुख्यालय के बाहर हंगामा करते रहे. छात्रों ने विश्वविद्यालय मुख्यालय में लगे चैनल गेट को गुस्से में तोड़ने का भी प्रयास किया. विद्यार्थियों का हंगामे को देखते हुए कुलपति प्रो नमिता सिंह ने शाम पांच बजे सेंट्रल पैनल के जीते हुए पांचों उम्मीदवारों को मिलने की अनुमति दी. कुलपति के साथ मुलाकात के बाद यह निर्णय लिया गया कि शपथ ग्रहण विश्वविद्यालय मुख्यालय के कैंपस में ही आयोजित किया जायेगा. लेकिन कुछ ही मिनट बाद सेंट्रल पैनल के सभी सदस्यों ने यह बात मानने से इंकार कर हंगामा शुरू कर दिया. विद्यार्थियों के हंगामे को देखते हुए कुलपति नमिता सिंह शाम 5:45 बजे छात्रों के बीच पहुंचीं और उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन छात्रों का कहना था कि सभी समर्थकों के बीच शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाना चाहिए.
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