Patna News : गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने व पर्यावरण संरक्षण के लिए बुडको द्वारा नयी पहल की जा रही है. शहर के छोटे नालों के गंदे पानी को बिना किसी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में भेजे ही जापानी बायोरीमेडिएशन तकनीक से साफ करने की तैयारी है. इस तकनीक के जरिए नाले के पानी में मौजूद गंदगी का बायोलॉजिकल प्रक्रिया से इलाज कर उसके प्रदूषण स्तर को नदी में जाने से पहले ही घटा दिया जाएगा. बता दें कि, नालों का आकार भले छोटा हो, लेकिन उनसे निकलने वाली गंदगी गंगा के लिए बड़ा खतरा होती है. इसलिए, यह मॉडल गंगा स्वच्छता में मील का पत्थर साबित होगा.
10 प्रमुख घाटों पर मशीनों को इस्टॉल करने की तैयारी
हाल ही में एनआइटी घाट पर बीइंग हेल्पर फाउंडेशन व बुडको के ब्रांड एंबेसडर शुभम कुमार द्वारा प्रोजेक्ट ब्लू इकोसिस्टम के तहत अमलगम बायोटेक के सहयोग से छोटे ड्रेनेज ट्रीटमेंट टैंक का सफल ट्रायल किया गया. इस प्रयोग की सफलता के बाद अब बारिश का मौसम खत्म होते ही गोलकपुर घाट, आलमगंज घाट, भद्र घाट समेत पटना के 10 प्रमुख घाटों पर इस सिस्टम को इंस्टॉल किया जाएगा.
प्रति मशीन इंस्टॉल करने में खर्च होगी 2.5 लाख
प्रति नाले में इस तकनीक को स्थापित करने पर करीब दो से ढाई लाख रुपये का खर्च आएगा. आमतौर पर छोटे नालों के पानी को एसटीपी तक पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण और खर्चीला होता है. ऐसे में यह छोटा और प्रभावी मॉडल सीधे गंगा में गिरने वाले नालों के मुहाने पर ही पानी का इलाज कर देगा. इसपर शुभम ने बताया कि नालों को ट्रीट करने वाली मशीनें करीब 20 लाख की होती है. लेकिन, इससे पैसे की भी बचत होगी.
