Patna Underground Power Cables : पटना शहर में बिजली व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए 33 केवी की सभी हाईटेंशन लाइनों को अंडरग्राउंड करने की योजना है. लक्ष्य के अनुसार जून 2027 तक शहर में मौजूद 33 केवी के सभी बिजली तार भूमिगत कर दिए जाएंगे. इसके साथ ही प्रमुख सड़कों और व्यस्त इलाकों में 11 केवी तथा एलटी लाइन को भी अंडरग्राउंड किया जाएगा.
328 करोड़ रुपये होंगे खर्च
इस पूरी योजना पर करीब 328 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. परियोजना के तहत शहर के बिजली नेटवर्क के उन हिस्सों को भूमिगत किया जा रहा है, जहां हाइटेंशन और एलटी लाइनें वर्तमान में ऊपर से गुजर रही हैं. इसका उद्देश्य बिजली आपूर्ति को सुरक्षित बनाने के साथ तार टूटने से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका कम करना है.
आयकर गोलंबर से गांधी मैदान तक बदलेगी व्यवस्था
योजना के तहत आयकर गोलंबर से वीरचंद पटेल पथ और जंक्शन रोड, एग्जीबिशन रोड होते हुए गांधी मैदान सर्किल तथा बांकीपुर-दीघा रोड और बुद्धमार्ग होते हुए वापस आयकर गोलंबर तक पूरे सर्किल में 11 केवी हाईटेंशन लाइन को अंडरग्राउंड किया जाएगा. यह शहर के महत्वपूर्ण और व्यस्त हिस्सों में से एक है.
डाकबंगला और जंक्शन गोलंबर की एलटी लाइन भी होगी भूमिगत
डाकबंगला, पटना जंक्शन गोलंबर और गांधी मैदान जैसे प्रमुख स्थानों पर एलटी लाइन को भी पूरी तरह अंडरग्राउंड करने की योजना है. इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है, इसलिए यहां बिजली तारों को भूमिगत करने पर खास जोर दिया जा रहा है.
95 किमी 33 केवी लाइन में 35 किमी का काम पूरा
पटना शहर में फिलहाल करीब 95 किलोमीटर 33 केवी लाइन मौजूद है. इसमें से लगभग 35 किलोमीटर लाइन को अंडरग्राउंड किया जा चुका है. इसमें राजेंद्र नगर से डाकबंगला चौराहा तक का स्ट्रेच तथा वहां से एसपी वर्मा रोड होते हुए गोलघर तक का हिस्सा शामिल है.
बाकी 60 किमी लाइन का काम बारिश के बाद
33 केवी की बची करीब 60 किलोमीटर लाइन को भी भूमिगत करने का काम पूरा किया जाना है. इनमें गोलघर से गांधी मैदान सर्किल होते हुए रामगुलाम चौक और एग्जीबिशन रोड तक की लाइन भी शामिल है. बारिश के कारण इस हिस्से का काम बीच में रोकना पड़ा है, जिसे मौसम सामान्य होने के बाद आगे बढ़ाया जाएगा.
11 केवी की 155 किमी लाइन होगी अंडरग्राउंड
शहर में 11 केवी की कुल करीब 356 किलोमीटर लाइन है. इसमें से 155 किलोमीटर तार को अंडरग्राउंड करने की योजना है. अब तक करीब 40 किलोमीटर 11 केवी लाइन भूमिगत की जा चुकी है. बाकी 115 किलोमीटर लाइन को अंडरग्राउंड करने का काम बारिश पूरी तरह खत्म होने के बाद शुरू किया जाना है.
2 जुलाई 2027 तक 11 केवी अंडरग्राउंड करने का लक्ष्य
योजना के अनुसार 11 केवी की बची हुई 115 किलोमीटर लाइन को 2 जुलाई 2027 तक अंडरग्राउंड करने का लक्ष्य रखा गया है. काम पूरा होने के बाद भी पेसू क्षेत्र में करीब 201 किलोमीटर 11 केवी लाइन जमीन के ऊपर रहेगी.
बची लाइनों पर लगेगा कवर्ड कंडक्टर
जो 11 केवी लाइन ऊपर से रहेगी, उसे सुरक्षित बनाने के लिए कवर्ड कंडक्टर लगाने का काम भी किया जा रहा है. योजना के अनुसार इस काम को जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है. इससे खुले तारों के संपर्क में आने और टूटने की स्थिति में दुर्घटना के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी.
आंधी-बारिश में तार टूटने का खतरा होगा कम
बिजली तारों को अंडरग्राउंड करने का मुख्य उद्देश्य आम लोगों के लिए बिजली नेटवर्क को सुरक्षित बनाना है. सभी 33 केवी हाईटेंशन लाइन भूमिगत होने और 11 केवी लाइनों को अंडरग्राउंड या कवर्ड कंडक्टर से सुरक्षित किए जाने के बाद आंधी जैसी स्थिति में तार टूटने से होने वाली जान-माल की क्षति की आशंका कम होगी.
व्यस्त इलाकों में बिजली व्यवस्था होगी सुरक्षित
पटना के प्रमुख बाजार, सड़क और सार्वजनिक स्थानों से गुजरने वाली बिजली लाइनों को भूमिगत करने से शहरी बिजली नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने का प्रयास है. खासकर उन क्षेत्रों में इसका असर पड़ेगा, जहां सड़क किनारे ऊपर से गुजरने वाले तारों के कारण खतरा बना रहता है.
