Bihar News: पटना और आसपास के इलाकों में कचरे की समस्या से निपटने के लिए महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है. अब कचरे को सिर्फ डंप नहीं किया जाएगा, बल्कि उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होगा. इसी कचरे से बिजली और बायोगैस भी तैयार की जाएगी.
इसके लिए मगध रिसोर्स रिकवरी सस्टेनेबल सॉल्यूशंस लिमिटेड नाम से नई कंपनी बनाई गई है. यह कंपनी अगले 20 वर्षों तक कचरे के प्रसंस्करण और बिजली उत्पादन की जिम्मेदारी संभालेगी.
बैरिया में बनेगा अत्याधुनिक वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट
पटना के रामचक बैरिया में एक बड़ा सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा. इस पूरे प्रोजेक्ट का मकसद कचरे का अधिकतम वैज्ञानिक इस्तेमाल करना है.
प्लांट तैयार होने के बाद यहां से हर दिन करीब 15 मेगावाट स्वच्छ एनर्जी पैदा होगी. इससे एक तरफ कचरे का निस्तारण होगा, तो दूसरी तरफ बिजली उत्पादन भी किया जाएगा.
20 साल तक कंपनी संभालेगी प्लांट
इस परियोजना को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है. इसे केंद्रीय वित्त मंत्रालय और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय से मंजूरी मिल चुकी है. बैरिया में प्लांट करीब ढाई साल में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके बाद अगले 20 वर्षों तक कंपनी इसका संचालन और रखरखाव करेगी. पटना नगर निगम को इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है.
पटना समेत इन 13 निकायों का कचरा पहुंचेगा
इस परियोजना के तहत पटना क्लस्टर के 13 नगर निकायों के कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा. इसमें पटना नगर निगम के अलावा दानापुर निजामत, फतुहा, खगौल, फुलवारीशरीफ, बख्तियारपुर, मसौढ़ी, बिहटा, संपतचक और मनेर नगर परिषद शामिल हैं. वहीं नौबतपुर, पुनपुन और खुसरूपुर नगर पंचायत का कचरा भी इसी परियोजना के तहत प्रोसेस किया जाएगा.
कचरे से बिजली ही नहीं, बायोगैस भी बनेगी
बैरिया के प्लांट में कचरे को अलग-अलग तरीके से प्रोसेस किया जाएगा. यहां कई यूनिट स्थापित की जाएंगी.
15 मेगावाट का पावर प्लांट
कचरे से नवीकरणीय ऊर्जा तैयार की जाएगी. प्लांट से रोजाना करीब 15 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है.
बायो-मीथेनेशन प्लांट
गीले कचरे से बायोगैस तैयार की जाएगी. इस यूनिट की क्षमता 100 टन प्रतिदिन होगी.
जैविक खाद भी बनेगी
गीले कचरे से कम्पोस्ट तैयार की जाएगी. इसकी क्षमता करीब 700 टन प्रतिदिन होगी. इससे कचरे का दोबारा उपयोग बढ़ेगा.
कचरे की होगी मशीन से छंटाई
कचरे को अलग करने के लिए 250 टन क्षमता वाली तीन यूनिट लगाई जाएंगी. इसके अलावा 50 टन क्षमता की एक अतिरिक्त यूनिट होगी. इस प्रक्रिया में आरडीएफ यानी कचरे से तैयार होने वाला ईंधन भी बनाया जाएगा.
सुरक्षित लैंडफिल भी बनेगा
जो कचरा दोबारा इस्तेमाल नहीं हो सकेगा, उसके लिए वैज्ञानिक लैंडफिल बनाया जाएगा. इसकी क्षमता 325 टन प्रतिदिन होगी.
शहर को गंदगी और बदबू से मिलेगी राहत
इस परियोजना का सीधा असर पटना और आसपास के इलाकों पर पड़ेगा. फिलहाल बड़ी मात्रा में कचरा डंपिंग यार्ड में पहुंचता है. इससे आसपास रहने वाले लोगों को बदबू और प्रदूषण की समस्या होती है.
वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निस्तारण होने के बाद लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम होगी. इससे आसपास के इलाकों को राहत मिलने की उम्मीद है.
ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी घटेगा
परियोजना को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण से पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव कम होगा.
डंपिंग यार्ड में कचरा कम जाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन भी घटेगा. यानी यह प्रोजेक्ट पटना के लिए सिर्फ कचरा प्रबंधन की योजना नहीं है. इससे स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद और बायोगैस का भी उत्पादन होगा.
सरकार और कंपनी के बीच हुआ करार
पटना नगर निगम मुख्यालय में नगर विकास विभाग, पटना नगर निगम और मगध रिसोर्स रिकवरी के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ.
करार पर विभाग के उप सचिव रंजन कुमार चौधरी, निगम के मुख्य नगर अभियंता बिंदू रजक और कंपनी की ओर से संजीव कुमार ने हस्ताक्षर किए.
अब इस समझौते के बाद बैरिया में प्लांट निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. अगले ढाई साल में प्लांट तैयार होने के बाद पटना क्लस्टर के कचरे को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है.
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