Patna Student Arrest : "मैं बीमार हूं.. मेरा बेटा दवा लेने के लिए घर से निकला था, मैंने मना भी किया था कि मत जाओ, लेकिन कहा कि नहीं पापा जी मैं लेकर आता हूं. मेरे बेटे को पुलिस ने उठा लिया, बहुत मारा है, वो चल भी नहीं पा रहा है". ये कहना है जजेज आवास के बाहर खड़े एक बेबस पिता का जो अपने बेटे की रिहाई के लिए लगातार चक्कर काट रहे हैं. बेटा पुलिस के कस्टडी में है, और पिता बेटे को छुड़ाने के लिए लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं. यह मांग केवल एक पिता की नहीं है बल्कि जजेज आवास के बाहर खडे़ सैकड़ों परिवार की है. किसी का दोस्त किसी का भाई तो किसी का बेटा पुलिस गिरफ्त में है.
जजेज आवास के बाहर परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
परिजनों ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. परिजनों का कहना है कि हिरासत में लिए गए सभी छात्रों के साथ बर्बरता से मारपीट की गई है. आरोप है कि उनके बच्चों पर धारा 109 लगाया गया है. सभी पढ़ने वाले बच्चों के साथ आपराधियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है. परिजनों का कहना है कि उन्हें जब जानकारी मिली की उनके बच्चों को गिरफ्तार कर लिया गया है तो वो थाने में पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें सही जानकारी नहीं दी. कभी गांधी मैदान थाना तो कभी राजीव नगर थाना भेजा गया. 30 से 35 घंटे थाने में बंद कर छात्रों को रखा गया. जिसके बाद देर रात जजेज आवास में पेशी के बाद सभी गिरफ्तार छात्रों को बेऊर जेल भेज दिया गया है.
क्या है पूरा मामला ?
बता दें कि पिछले दिनों 22 और 25 जुलाई को पटना में छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया था. 25 जुलाई को पटना की सड़कों पर हालत गंभीर थे. छात्रों की ओर से पुलिस पर पथराव किए जाने का आरोप है. जिसके बाद पुलिस एक्शन मोड में आ गई है और सभी छात्रों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है. रविवार की आधी रात ही 258 छात्रों को बेऊर जेल भेजा गया. जानकारी के मुताबिक, इस मामले में 24 प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिनमें 285 नामजद और करीब 6 हजार अज्ञात आरोपित हैं.
लेपटॉप खरीदने गया था बेटा, पुलिस ने उठा लिया
रविवार की देर रात छज्जू बाग स्थित जजेज आवास छात्रों को लाया गया था.अंदर में सुनवाई चल रही थी और बाहर बड़ी संख्या में छात्रों के परिजन इंतजार कर रहे थे. इस दौरान परिजनों ने कई गंभीर आरोप पुलिस पर लगाए. बाहर खड़े एक पिता ने कहा कि उन्हें बीमारी है और उनका बेटा दवा लेने के लिए घर से बाहर गया था लेकिन पुलिस ने उसे उठा लिया. दूसरे पिता ने कहा कि उनका बेटा लेपटॉप खरीदने के लिए एसपी वर्मा रोड गया हुआ था, उसे भी पुलिस ने उठा लिया. जजेज आवास के बाहर खड़े एक लड़के ने कहा कि उसका दोस्त गांधी मैदान गया था किताब खरीदने लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
30 से 35 घंटे तक थाने में रखा गया
एक अन्य परिजन ने कहा कि मेरा भाई गांधी मैदान के पास सब्जी लेने आया था लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. मेरे भाई का फोन भी जब्त कर लिया गया, जिससे हमे कोई जानकारी नहीं मिली. परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बच्चों को उठाकर पहले गांधी मैदान में रखा फिर दीघा थाना में शिफ्ट कर 30 से 35 घंटे तक रखा. किसी भी परिजन को पुलिस की ओर से सही जानकारी नहीं दी गई. 10 मिनट 10 मिनट कर पुलिस बात को टालते रहे. आरोप लगाया कि गेट के बाहर परिजनों के साथ धक्का मुक्की भी की गई.
नाबालिग छात्र गांधी मैदान तो बालिक भेजे गए बेऊर
देर रात थाने से सभी छात्रों को एक वाहन में बैठाकर अस्पताल लाया गया और फिर उनका मेडिकल कराया गया. जिसके बाद जो नाबालिग छात्र थे उन्हें गांधी मैदान में रखा गया और जो बालिग थे उन्हें जजेज आवास लगाया गया. जहां उनकी पेशी हुई और पेशी के बाद बेऊर जेल भेज दिया गया. बताया जा रहा है कि सभी छात्रों के खिलाफ बीएनएस की धारा 109 और 121 के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. धारा 109 हत्या का प्रयास से संबंधित है, जबकि धारा 121 किसी लोक सेवक (सरकारी कर्मचारी या पुलिस) को उसके कर्तव्य का पालन करने से रोकने या डराने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुंचाने या गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित है.
पुलिस ने क्या कहा ?
इस तरह हो रही छात्रों की पहचान छात्रों पर हो रही कार्रवाई को लेकर पुलिस का कहना है कि छात्रों की पहचान सीसीटीवी फुटे़ज, वीडियोज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जो सबूत मौजूद हैं, उसके आधार पर किया जा रहा है. इससे पहले भी 22 जुलाई को जब पटना में प्रदर्शन किए गए थे, तब 117 संदिग्धों के फोटो जारी किए गए थे.
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