महादलित चेहरे पर बीजेपी लगाएगी दांव? क्या राजकपूर धनकार बनेंगे विधान परिषद सदस्य

Patna News: राजकपूर धनकार ने कम समय में बीजेपी संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई है.

Patna News: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नाम तेजी से चर्चा में है. वह नाम है राजकपूर धनकार. बीजेपी में शामिल होने के बाद कम समय में ही उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है और पार्टी संगठन के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के बीच भी मजबूत पकड़ बनाई है. ऐसे में अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बीजेपी उन्हें विधान परिषद का सदस्य बना सकती है.

विधानसभा चुनाव में निभाई थी अहम भूमिका

राजकपूर धनकार ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी जिले में बीजेपी और एनडीए प्रत्याशियों के समर्थन में जोरदार प्रचार किया था. राजनीतिक जानकारों की मानें तो उन्होंने कई सीटों पर संगठन को मजबूत करने और वोटरों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई. कहा जाता है कि जिन 20 सीटों पर उन्होंने सक्रिय प्रचार किया, उनमें से लगभग 18 सीटों पर एनडीए को सफलता मिली.

यही कारण है कि पार्टी के भीतर भी उनकी सक्रियता और मेहनत की चर्चा लगातार होती रही है.

महादलित डोम समाज से आते हैं राजकपूर धनकार

राजकपूर धनकार महादलित डोम समाज से आते हैं. बिहार की राजनीति में यह समाज लंबे समय से राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है. विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने डोम समाज को एक भी टिकट नहीं दिया था. ऐसे में अब यह माना जा रहा है कि पार्टी सामाजिक संतुलन और राजनीतिक संदेश देने के लिए उन्हें विधान परिषद भेज सकती है.

अगर ऐसा होता है तो बीजेपी की ओर से महादलित समाज को बड़ा संदेश माना जाएगा.

गरीबों और वंचितों की आवाज उठाते रहे हैं

राजकपूर धनकार लगातार गरीबों, वंचितों और दलित समाज के अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं. सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें जमीनी नेता के रूप में पहचान दिलाई है. वे कई बार समाज के कमजोर वर्गों को उनका अधिकार दिलाने की बात खुलकर करते नजर आए हैं.

यही वजह है कि कार्यकर्ताओं के बीच भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है.

पहले भी बीजेपी दे चुकी है बड़ा संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी पहले भी सामाजिक समीकरण साधने के लिए नए चेहरों को मौका देती रही है. जब बीजेपी ने लालमोहन गुप्ता को विधान परिषद का सदस्य बनाया था, तब भी इसे एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना गया था.

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या पार्टी उसी रणनीति के तहत राजकपूर धनकार पर दांव लगाएगी.

फैसला बीजेपी नेतृत्व के हाथ में

हालांकि अभी तक बीजेपी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. लेकिन जिस तरह से राजकपूर धनकार संगठन में सक्रिय हैं और सामाजिक समीकरणों में फिट बैठते हैं, उससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है.

अब देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी आने वाले समय में राजकपूर धनकार को विधान परिषद भेजकर महादलित समाज और पार्टी कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश देती है या नहीं.

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By Vivek Ranjan

विवेक रंजन पाण्डेय पिछले 8 वर्षों से टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने Aryabhatta Knowledge University, Patna से BJMC की पढ़ाई की है.

उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Network 10 टीवी चैनल से की. इसके बाद News India, News18 Digital सहित कई राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग और कंटेंट राइटिंग का अनुभव प्राप्त किया.

वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम में Content Writer के रूप में कार्यरत हैं. यहां बिहार की राजनीति, चुनाव, शिक्षा, कृषि, रोजगार, सरकारी योजनाओं, सामाजिक सरोकारों और विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों पर तथ्यपरक और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं.

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