Patna News: (आनंद तिवारी की रिपोर्ट) पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में सोमवार को लगी भीषण आग के बाद मेंटनेंस को लेकर अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है. मंगलवार को पीएमसीएच के प्रिंसिपल प्रो. डॉ. एपी सिंह और फायर सेफ्टी विभाग की टीम ने घटनास्थल का विस्तृत मुआयना किया.
जांच और लैब टेक्नीशियनों से पूछताछ के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग में पिछले 20 वर्षों से सही तरीके से मेंटनेंस का कार्य ही नहीं किया गया था. कर्मचारियों ने बताया कि इस इमारत में साल में तीन से चार बार शॉर्ट-सर्किट, बिजली के तारों से चिंगारी निकलने और धुआं उठने जैसी घटनाएं आम थीं, जिसे लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा. इस घटना के बाद अब अस्पताल प्रशासन ने नए सिरे से पूरी वायरिंग और मरम्मत कराने का निर्णय लिया है.
बिजली ठप, भीषण गर्मी में खराब हो रहे हैं कीमती सैंपल्स
आग लगने के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग में बिजली व्यवस्था बहाल नहीं की जा सकी है. लैब टेक्नीशियन अभय कुमार ने बताया कि विभाग में बचे हुए कई कीमती एचआईवी सैंपल्स के खराब होने की पूरी संभावना है. इन सैंपल्स को सुरक्षित रखने के लिए माइनस 21 डिग्री ($-21^\circ\text{C}$) तापमान की आवश्यकता होती है, लेकिन पिछले 24 घंटे से अधिक समय से बिजली ठप होने के कारण ये सैंपल भीषण गर्मी में पड़े हुए हैं.
एसी-फ्रीज जले, अब सैंपल स्टोर करने के लिए करना होगा लंबा इंतजार
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, इस मॉडल सेंटर में हर दिन 60 से 70 सैंपल जांच के लिए आते हैं, जिन्हें पहले स्टोर में रखा जाता है. आग के कारण विभाग के सभी एसी और रेफ्रिजरेटर जलकर खाक हो चुके हैं, जिससे सैंपल स्टोरेज की क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई है. यह पूरी प्रक्रिया बिहार एड्स कंट्रोल सोसाइटी द्वारा संचालित होती है, इसलिए अब सोसाइटी द्वारा नई मशीनें उपलब्ध कराने और व्यवस्था बहाल करने में कई महीनों का लंबा वक्त लग सकता है. मंगलवार को सारा सिस्टम ठप होने के कारण एक भी मरीज की जांच नहीं हो सकी.
झारखंड और ओडिशा के मरीजों की भी बढ़ीं मुश्किलें
पीएमसीएच का यह माइक्रोबायोलॉजी विभाग तीन मंजिला भवन में संचालित होता है, जिसमें बैक्टिरियोलॉजी, सेरोलॉजी और वायरोलॉजी जैसी विधाओं के तहत वायरस और बैक्टीरिया से संबंधित 45 तरह की गंभीर जांचें होती हैं. इस विभाग को एक ‘मॉडल सेंटर’ का दर्जा प्राप्त है, जहाँ बिहार के कोने-कोने के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे झारखंड और ओडिशा से भी मरीज अपने सैंपल जांच के लिए भेजते हैं. इस व्यवस्था के ठप होने से तीनों राज्यों के हजारों मरीजों की परेशानी बढ़ गई है.
इन प्रमुख 45 बीमारियों की जांच अब हुई ठप:
एचआईवी एवं एचआईवी वायरल लोड टेस्ट, सीडी-4 काउंट फॉर एचआईवी ,ब्लड, यूरीन, स्टूल एवं पीयूएस कल्चर,मलेरिया पैरासाइट, कालाजार और टायफाइड टेस्ट,वाइडल टेस्ट और लिप्रोसी टेस्ट मिजिल्स, मंप्स, रूबेला, टॉक्सोप्लाजमा, एंटी वीजेडवी, एचएसवी और सीएमवी
छात्रों की पढ़ाई और प्रैक्टिकल भी हुआ बाधित
इस हादसे का सीधा असर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों पर भी पड़ेगा. आगामी कई महीनों तक एमबीबीएस और पीजी के छात्रों की प्रैक्टिकल कक्षाएं पूरी तरह बाधित रहेंगी और वे लैब में जाकर जांच की विधि नहीं सीख पाएंगे.
क्या कहते हैं विभागाध्यक्ष?
आग की वजह से कई महत्वपूर्ण मशीनें पूरी तरह जल गई हैं और भवन को भी काफी क्षति पहुंची है. मरम्मत का कार्य प्राथमिक स्तर पर शुरू कर दिया गया है, लेकिन पूरी व्यवस्था को पटरी पर लौटने में समय लगेगा. एड्स कंट्रोल सोसाइटी की टीम ने भी दौरा किया है और उन्हें रिपोर्ट सौंप दी गई है. जिन छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षा इस आगजनी के कारण टल गई थी, उनकी परीक्षा अगले सप्ताह आयोजित की जाएगी.
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