बिहार के ‘गोल्डमैन’ का बड़ा फैसला: अब नहीं खरीदेंगे नए आभूषण, जानिए वजह

Patna News: बिहार के चर्चित ‘गोल्डमैन’ प्रेम सिंह ने नया सोना और आभूषण नहीं खरीदने का फैसला लिया है. पांच किलो सोना पहनने और गोल्ड प्लेटेड बुलेट से मिली थी पहचान.

Patna News:(हिमांशु देव की रिपोर्ट) राजधानी पटना निवासी प्रेम सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं. लोग उन्हें बिहार के गोल्डमैन के नाम से जानते हैं. वजह है उनके शरीर पर हमेशा दिखने वाले भारी-भरकम सोने के आभूषण. प्रेम सिंह कहते हैं कि करीब पांच किलो से अधिक सोना पहनते हैं. उनके गले में मोटी सोने की चेन, हाथों में कई कड़े और अंगूठियां रहती हैं.इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी बुलेट बाइक को भी सोने की परत से खास तरीके से तैयार कराया है.

हाल के दिनों में प्रेम सिंह ने नया सोना खरीदने से दूरी बनाने की बात कही है. उन्होंने कहा कि देशहित सबसे पहले है और जरूरत पड़ने पर लोग अपनी आदतों में बदलाव कर सकते हैं. हालांकि सोशल मीडिया पर उनके इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग इसे देशभक्ति बता रहे हैं, तो कुछ लोग इसे सिर्फ चर्चा में बने रहने की कोशिश मान रहे हैं.

प्रेम सिंह का कहना है कि उन्हें सोना पहनने का शौक बचपन से है और यह उनकी पहचान बन चुका है.वे कहते हैं कि बिहार में कानून व्यवस्था बेहतर होने के कारण उन्हें डर नहीं लगता. आज उनकी गिनती देश के चर्चित गोल्डमैन में होती है और जहां भी वह जाते हैं, लोग उनके साथ तस्वीर खिंचवाने लगते हैं.

बाइक पर सोने की चढ़ाई परत

प्रेम सिंह मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं और पटना में कारोबार से जुड़े हैं. पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया, यूट्यूब और टीवी चैनलों पर उनके वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद उनकी पहचान पूरे देश में बन गई. पिछले साल उन्होंने प्रभात खबर से बातचीत में बताया था है कि उनकी सोने से सजी बाइक को तैयार करने में कई महीने लगे थे और इसमें करीब दस लाख रुपये खर्च हुए.

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By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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