पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
पटना. दानापुर सैन्य क्षेत्र में 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस मौके पर राज्यपाल सह सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और झारखंड एवं बिहार सब एरिया के जीओसी मेजर जनरल जितेंद्र सिंह ने संत लुक चर्च के समीप विकसित किए गए 'सिंदूर पार्क' में पौधारोपण किया. कार्यक्रम का उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर की स्मृतियों को सहेजने के साथ पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रभक्ति का संदेश देना था.
राज्यपाल बोले. सिंदूर पार्क शौर्य और सम्मान का प्रतीक
राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि बिहार में सैनिकों के सम्मान और उनके योगदान को और अधिक प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि देश के सम्मान और शौर्य का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि बहनों का सिंदूर वापस नहीं लौटाया जा सकता, लेकिन देश ने उसका जवाब पूरी दृढ़ता से दिया. राज्यपाल ने बताया कि देश में पहली बार 'सिंदूर पार्क' में 350 पौधों का रोपण किया गया है, जो वीरता, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बनेगा.
मेजर जनरल ने बताया पार्क का उद्देश्य
झारखंड एवं बिहार सब एरिया के जीओसी मेजर जनरल जितेंद्र सिंह ने कहा कि सैनिक चौक के समीप विकसित किया गया 'सिंदूर पार्क' आने वाली पीढ़ियों को देश के सैन्य इतिहास और वीरता से जोड़ने का कार्य करेगा. उन्होंने कहा कि यह पार्क केवल हरियाली बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा के मूल्यों को सहेजने की पहल भी है.
बीएयू की तर्ज पर विकसित होगा सिंदूर पार्क
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने बताया कि दानापुर का 'सिंदूर पार्क' बीएयू, सबौर में विकसित मॉडल की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है. यह पार्क 'ऑपरेशन सिंदूर' की गौरवगाथा को जीवंत रखने के साथ समाज में राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जागरूकता का संदेश देगा.
महिला सशक्तिकरण से भी जुड़ेगा सिंदूर पार्क
कार्यक्रम में बताया गया कि पारंपरिक रूप से सुहाग का प्रतीक माने जाने वाले सिंदूर को अब महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता से भी जोड़ा जाएगा. 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प के तहत इस पार्क के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे.
शौर्य, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का बनेगा केंद्र
सिंदूर पार्क को सैन्य गौरव, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के संगम के रूप में विकसित किया जा रहा है. अधिकारियों का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में देशभक्ति की भावना को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के अभियान को भी नई दिशा देगी.
