मुख्यमंत्री सहयोग शिविर में नहीं पहुंचे अधिकारी, समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे ग्रामीण लौटे मायूस

मुख्यमंत्री सहयोग शिविर का आयोजन पंचायत स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए किया गया था, लेकिन बिहटा प्रखंड की कई पंचायतों में संबंधित विभागों के अधिकारी अनुपस्थित रहे। इससे ग्रामीणों को भारी निराशा हुई और उन्होंने इसे महज एक औपचारिकता बताया।

बिहार सरकार की ओर से पंचायत स्तर पर आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से आयोजित मुख्यमंत्री सहयोग शिविर बिहटा प्रखंड की विष्णुपुरा, लई और पुरुषोत्तमपुर पैनाठी पंचायतों में लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका. शिविर में संबंधित विभागों के पदाधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे ग्रामीणों को निराश होकर लौटना पड़ा.

समस्याएं लेकर पहुंचे ग्रामीण, नहीं मिले जिम्मेदार अधिकारी

ग्रामीणों ने बताया कि वे जमीन विवाद, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बिजली, पेयजल, कृषि समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए शिविर में पहुंचे थे. लेकिन संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद नहीं रहने से न तो शिकायतों का समाधान हो सका और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई की गई.

लई पंचायत में राशन कार्ड और पेंशन के सबसे अधिक मामले

लई पंचायत में आयोजित शिविर में सबसे अधिक शिकायतें राशन कार्ड और वृद्धा पेंशन से जुड़ी थीं. कई ग्रामीण लंबे समय से इन समस्याओं से जूझ रहे हैं और समाधान की उम्मीद लेकर शिविर में पहुंचे थे. हालांकि संबंधित विभाग के अधिकारी नहीं होने के कारण उन्हें बिना समाधान के लौटना पड़ा. इससे ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई.

ग्रामीणों ने कहा. खानापूर्ति बनकर रह गया शिविर

ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्यमंत्री सहयोग शिविर केवल औपचारिकता बनकर रह गया है. सरकार पंचायत स्तर पर समस्याओं के समाधान का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारी ही मौजूद नहीं हैं. लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार पदाधिकारी ही शिविर में नहीं पहुंचेंगे तो आम जनता को इसका लाभ कैसे मिलेगा.

पहले दिए गए आश्वासन भी नहीं हुए पूरे

ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी जमीन सहित अन्य समस्याओं को लेकर आवेदन लिए गए थे और जल्द समाधान का भरोसा दिया गया था. लेकिन अधिकांश मामलों में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. अब मुख्यमंत्री सहयोग शिविर में भी वही स्थिति देखने को मिली, जिससे लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है.

योजना के उद्देश्य पर उठे सवाल

बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री सहयोग शिविर की शुरुआत इस उद्देश्य से की थी कि लोगों को सरकारी सेवाओं के लिए प्रखंड, अनुमंडल और जिला मुख्यालय का बार-बार चक्कर न लगाना पड़े. शिविर के माध्यम से राजस्व, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बिजली, पेयजल, राशन और पेंशन जैसी सेवाएं पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराने का दावा किया गया है. लेकिन बिहटा की इन पंचायतों में अधिकारियों की अनुपस्थिति ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

ग्रामीणों ने की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में आयोजित होने वाले मुख्यमंत्री सहयोग शिविर में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य की जाए, ताकि लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान हो सके और सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंचे. इस संबंध में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका.


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