अब अपार्टमेंट में भी बनेंगे मतदान केंद्र, बढ़ेगा वोटिंग प्रतिशत

लोकतंत्र का उत्सव अब और घर के नजदीक होगा. आपको वोट देने के लिए न लंबी कतारें झेलनी होंगी और न ही बूथ तक पहुंचने के लिए सफर तय करना पड़ेगा.

संवाददाता, पटना लोकतंत्र का उत्सव अब और घर के नजदीक होगा. आपको वोट देने के लिए न लंबी कतारें झेलनी होंगी और न ही बूथ तक पहुंचने के लिए सफर तय करना पड़ेगा. भारत निर्वाचन आयोग का एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी आदेश आया है जिससे शहरी मतदाताओं का मतदान में उत्साह और भागीदारी दोनों बढ़ने की उम्मीद है. देश के शहरी इलाकों में गिरते मतदान प्रतिशत को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग अब अपार्टमेंट परिसरों और रिहायशी कॉलोनियों के भीतर ही मतदान केंद्र बनाने का निर्देश दिया है. यह निर्णय खासतौर पर बिहार जैसे राज्यों में और भी महत्वपूर्ण है, जहां अपार्टमेंट संस्कृति तेजी से बढ़ रही है और नगरपालिका क्षेत्रों की संख्या 261 तक पहुंच गयी है. पटना के अपार्टमेंटों में रहनेवाले लाखों मतदाता अक्सर बूथ की दूरी और लंबी कतारों से परेशान होकर वोट देने से कतराते हैं. 2024 के केएपी सर्वे के मुताबिक, 6.3प्रतिशत मतदाताओं ने दूरी को मतदान नहीं करने का कारण बताया़ वहीं, 2.4प्रतिशत मतदाताओं ने लंबी कतारों का हवाला दिया. अब आयोग की नयी रणनीति से यह दूरी भी घटेगी और कतारें भी. एक बूथ पर केवल 1200 वोटर : अब एक बूथ केवल 1200 मतदाताओं के लिए होगा. वर्तमान में राज्य में 77895 बूथ हैं, जो पहले 1500 मतदाताओं के मानक पर बनाये गये थे. एक वोटर के लिए भी स्थापित होता है बूथ : भारत निर्वाचन आयोग की प्रतिबद्धता कोई नई बात नहीं है. गुजरात के जंगलों में सिर्फ एक मतदाता के लिए बूथ स्थापित किया जा चुका है. होम वोटिंग का हो चुका है प्रयोग : 2024 के लोकसभा चुनाव में आयोग ने एक और क्रांतिकारी पहल की. 85 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए होम वोटिंग की व्यवस्था है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 में से 39 सीटों पर मतदान राष्ट्रीय औसत से नीचे रहा. खासकर पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र में मात्र 45.8 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था. अपने बिहार दौरे में निर्वाचन आयुक्त डाॅ विवेक जोशी ने मतदान प्रतिशत के संदर्भ में चिंता व्यक्त की थी. उन्होंने कहा था कि जहां मतदान का राष्ट्रीय औसत प्रतिशत 66.10 है, वहीं बिहार में पिछले लोकसभा चुनाव में मात्र 56.28% मतदान हुआ.

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