अब लीची 90 दिनों तक रहेगी खाने के योग्य

बिहार की शाही लीची की सेल्फ लाइफ अब 90 दिनों तक करने की तैयारी है. मेडागास्कर से इसकी तकनीक का आयात किया जा रहा है.

By RAKESH RANJAN | May 20, 2025 1:37 AM

राजदेव पांडेय ,पटना बिहार की शाही लीची की सेल्फ लाइफ अब 90 दिनों तक करने की तैयारी है. मेडागास्कर से इसकी तकनीक का आयात किया जा रहा है. इससे बिहार की लीची के उपयोग या उसकी बिक्री के लिए कम से कम तीन माह तक सुरक्षित रखा जा सकेगा. इससे बिहार सहित समूचे भारत से लीची निर्यात की संभावनाएं कई गुना बढ़ जायेंगी. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने इसके लिए मेडागास्कर के विशेषज्ञों से उनकी तकनीकी मदद लेने का निर्णय लिया है. इसके लिए दोनों देशों के बीच एमओयू होने जा रहा है. अभी प्रोसेसिंग के जरिये लीची को खाने और उसके सुरक्षित रखने की तकनीक केवल पंद्रह दिन तक है. सामान्य स्थिति में दो से तीन दिन के बाद इसकी गुणवत्ता सुरक्षित नहीं रहती है. इसकी वजह से न केवल देश के बाहर निर्यात करने, बल्कि देश के अंदर की घरेलू मांग की ही पूर्ति नहीं हो पाती. एपीडा के सचिव डॉ सुधांशु ने प्रभात खबर को विशेष मुलाकात में बताया कि लीची के निर्यात के दायरे को बढ़ाने के लिए उसकी सेल्फ लाइफ बढ़ाने की जरूरत है. इससे बिहार के लीची निर्यातकों और उसके उत्पादक किसानों को फायदा होगा. यह कवायद मेडागास्कर से संभावित एमओयू यूएइ के बड़े ग्रुप लुलु ग्रुप इंंटरनेशल की पहल पर की जा रही है. इसमें लीची की सेल्फ लाइफ बढ़ाने कुछ प्रोटोकाल तय किये जायेंगे. मेडागास्कर दुनियाभर में लीची का सबसे बड़ा निर्यातक देश है. डॉ सुधांधु ने बताया कि मेडागास्कर के साथ होने वाला यह एमओयू बिहार सहित समूचे भारत की लीची निर्यात के लिए गेम चेंजर साबित होगा. भारत में लीची का बड़ा उत्पादक है बिहार लीची उत्पादन में बिहार का वही महत्व है जो दुनिया में मेडागास्कर का है. मेडागास्कर दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है, जबकि भारत में लीची का सबसे बड़ा उत्पादक बिहार है. लीची निर्यात के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत से 2024 मार्च तक करीब 639 मीट्रिक टन लीची का निर्यात हुआ. इसमें बिहार की भागीदारी 550 टन है.

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