इंजीनियर ‘मुन्ना’ कैसे बना बिहार का सबसे बड़ा नेता? पढ़िए नीतीश कुमार के 10 बार CM बनने तक की पूरी कहानी

Nitish Kumar: इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले पटना के एक छात्र से लेकर बिहार की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल होने तक का नीतीश कुमार का सफर काफी दिलचस्प रहा है. छात्र आंदोलन से शुरू हुई उनकी राजनीति कई चुनावी हार, संघर्ष और बड़े उतार-चढ़ाव से गुजरते हुए बिहार की सत्ता तक पहुंची.

Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का ऐलान कर दिया है. करीब दो दशकों से बिहार की सत्ता संभाल रहे नीतीश अब नया राजनीतिक अध्याय शुरू करने जा रहे हैं. उनके इस फैसले के बाद जेडीयू के कई कार्यकर्ता भावुक हो गए. पटना स्थित पार्टी कार्यालय में कुछ कार्यकर्ताओं ने नाराजगी भी जताई. कई लोग रोते हुए भी नजर आए.

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है. कभी चुनाव हारकर राजनीति छोड़ने का मन बना चुके नीतीश बाद में बिहार के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए.

बख्तियारपुर में हुआ जन्म

नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को पटना जिले के बख्तियारपुर में हुआ था. वह चार भाई-बहनों में सबसे छोटे थे. परिवार में उन्हें प्यार से ‘मुन्ना’ कहा जाता था. उनका पैतृक गांव नालंदा जिले का कल्याण बीघा है. यहीं से उनका पारिवारिक और सामाजिक जुड़ाव बना रहा.

पिता का राजनीति से जुड़ाव

नीतीश कुमार के पिता राम लखन सिंह पेशे से वैद्य थे. वह कांग्रेस की राजनीति से भी जुड़े थे. 1952 के पहले आम चुनाव में उन्होंने कांग्रेस से टिकट की उम्मीद की थी. लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद उनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया. परिवार खेती-किसानी से भी जुड़ा था. उनकी मां परमेश्वरी देवी गृहिणी थीं.

इंजीनियरिंग की पढ़ाई, लेकिन राजनीति की राह

नीतीश कुमार पढ़ाई में काफी तेज थे. परिवार ने उन्हें पटना के बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज (अब NIT पटना) में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए भेजा. कॉलेज के दिनों में ही उनकी रुचि छात्र राजनीति में बढ़ने लगी. उस समय देश में कांग्रेस सरकार के खिलाफ आंदोलन का माहौल था. नीतीश भी इन आंदोलनों से जुड़ गए.

छात्र संघ बनाकर बने अध्यक्ष

कॉलेज में छात्रों की समस्याओं को लेकर नीतीश एक्टिव हो गए. 1972 में उन्होंने बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन का गठन किया. इसके बाद वह यूनियन के अध्यक्ष भी चुने गए. यहीं से उनका नेतृत्व उभरकर सामने आया.

बिना दहेज की शादी

नीतीश कुमार की शादी नालंदा जिले की मंजू कुमारी सिन्हा से तय हुई थी. मंजू कुमारी ने पटना के मगध कॉलेज से समाजशास्त्र की पढ़ाई की थी. शादी के समय जब दहेज की बात सामने आई तो नीतीश नाराज हो गए. उन्होंने साफ कहा कि वह बिना दहेज शादी करेंगे. 22 फरवरी 1973 को दोनों का विवाह हुआ.

परिवार और निजी जीवन

नीतीश कुमार और मंजू कुमारी की एक ही संतान है. उनके बेटे का नाम निशांत है, जिसका जन्म 1975 में हुआ. मंजू कुमारी ने बीएड और एमए की पढ़ाई के बाद सरकारी स्कूल में शिक्षक के रूप में काम किया. 2007 में उनका निधन हो गया.

इंजीनियर की नौकरी छोड़ आंदोलन में कूदे

नीतीश कुमार को रांची में बिजली विभाग में ट्रेनी इंजीनियर की नौकरी मिली थी. लेकिन जब जयप्रकाश नारायण का आंदोलन शुरू हुआ तो उन्होंने नौकरी छोड़ दी. वह जेपी के संपूर्ण क्रांति आंदोलन में एक्टिव हो गए. उन्होंने छात्रों से कॉलेज बहिष्कार करने की अपील की और आंदोलन को मजबूत किया.

आपातकाल में जेल भी गए

आपातकाल के दौरान कई विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था. उस समय नीतीश कुमार भूमिगत हो गए थे. जून 1976 में उन्हें भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. वह करीब नौ महीने जेल में रहे. इसी दौर में उनका संपर्क कई समाजवादी नेताओं से हुआ.

शुरुआती चुनावों में मिली हार

1977 में आपातकाल खत्म होने के बाद बिहार विधानसभा चुनाव हुए. नीतीश कुमार ने नालंदा की हरनौत सीट से चुनाव लड़ा. लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 1980 में उन्होंने फिर से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार भी हार मिली. दो लगातार हार से वह काफी निराश हो गए थे. राजनीति छोड़ने का मन बना लिया था.

1985 में मिली पहली जीत

1985 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का टर्निंग प्वाइंट बना. इस बार उन्होंने हरनौत सीट से 22 हजार वोटों से जीत दर्ज की. यहीं से उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ने लगा.

लोकसभा पहुंचे और केंद्र में मंत्री बने

1989 में नीतीश कुमार ने बाढ़ लोकसभा सीट से चुनाव जीता. इसके बाद वह नेशनल पॉलिटिक्स में एक्टिव हो गए. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें रेल मंत्री बनाया गया. रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने कई सुधार किए. इसी दौरान तत्काल टिकट योजना शुरू की गई. बाद में वह कृषि मंत्री भी बने.

लालू यादव के खिलाफ बनाई मजबूत राजनीति

राजनीति के शुरुआती दौर में नीतीश कुमार और लालू यादव की जोड़ी काफी चर्चित थी. दोनों जेपी आंदोलन से निकले नेता थे. लेकिन समय के साथ दोनों के रास्ते अलग हो गए. 2005 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू के गठबंधन ने लालू यादव की पार्टी को हराया. इसके बाद नीतीश कुमार पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने.

‘सुशासन बाबू’ की छवि

मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने कानून-व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया. अपराध और अपहरण के मामलों पर सख्ती दिखाई. उन्होंने आर्म्स एक्ट लागू किया और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए. पंचायत चुनाव में अति पिछड़ा वर्ग को 20 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला भी काफी चर्चित रहा.

आलोचना भी, लोकप्रियता भी

नीतीश कुमार को कई बार राजनीतिक पाला बदलने के कारण विरोधियों ने ‘पलटूराम’ कहा. उन्होंने समय-समय पर बीजेपी और आरजेडी दोनों के साथ गठबंधन किया. लेकिन इसके बावजूद बिहार की राजनीति में उनकी पकड़ मजबूत बनी रही. जीतन राम मांझी के नौ महीने के कार्यकाल को छोड़ दें तो वह करीब 20 साल तक मुख्यमंत्री रहे. अब राज्यसभा जाने के फैसले के साथ उनका राजनीतिक सफर एक नए मोड़ पर पहुंच गया है.

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By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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