Nishant Kumar: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कैबिनेट में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को मंत्री बनाया गया है. गांधी मैदान में हुए भव्य समारोह में उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली. निशांत कुमार पहले बिना किसी राजनीतिक अनुभव या मेहनत के सीधे कोई पद नहीं लेना चाहते थे. लेकिन जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं के काफी समझाने के बाद निशांत इसके लिए तैयार हुए.
सादगी पसंद हैं निशांत
20 जुलाई 1975 को जन्मे निशांत कुमार की पहचान अब तक एक बेहद शांत स्वभाव के इंसान की रही है. उनकी माता स्वर्गीय मंजू सिन्हा एक शिक्षिका थीं. साल 2007 में अपनी मां के निधन के बाद निशांत काफी समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे. शिक्षा की बात करें तो उन्होंने पटना और मसूरी से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद रांची के मशहूर बीआईटी (BIT) मेसरा से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की डिग्री ली है. वे पेशे से एक इंजीनियर रहे हैं और राजनीति की चकाचौंध से हमेशा दूर ही दिखे.
कैसे हुई राजनीति में एंट्री?
निशांत कुमार ने इसी साल 8 मार्च 2026 को जेडीयू की सदस्यता ली. उन्हें पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सदस्यता दिलाई थी. हालांकि उस समय नीतीश कुमार खुद वहां मौजूद नहीं थे, लेकिन तभी से यह कयास लगाए जा रहे थे कि निशांत ही नीतीश कुमार के असली सियासी वारिस होंगे. अब मंत्री बनकर उन्होंने उन अटकलों पर मुहर लगा दी है.
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पार्टी नेताओं का था भारी दबाव
निशांत को एक्टिव पॉलिटिक्स में लाने के पीछे जेडीयू के बड़े नेताओं की बड़ी भूमिका रही है. पार्टी के नेताओं का मानना था कि नीतीश कुमार की विरासत को संभालने के लिए परिवार से किसी का होना जरूरी है. लंबे समय तक निजी जीवन तक सीमित रहने वाले निशांत अब सरकार का हिस्सा बनकर जनता की सेवा करेंगे. एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर से माननीय मंत्री बनने तक का उनका यह सफर बिहार की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों के सबसे बड़े बदलावों में से एक है.
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