नयी शिक्षा नीति वंचितों और महिलाओं को शिक्षा से वंचित करेगी

जेएनयू के पूर्व प्राध्यापक डॉ सच्चिदानंद सिन्हा ने कहा कि हमारे देश में राष्ट्रीय जागरण के अग्रदूतों और आजादी आंदोलन के नेताओं ने जिस शिक्षा व्यवस्था का सपना देखा था, उसमें केवल डिग्री प्राप्त करना ही नहीं था,

आइएमए हॉल में राज्य स्तरीय शिक्षा कन्वेंशन का आयोजन संवाददाता,पटना जेएनयू के पूर्व प्राध्यापक डॉ सच्चिदानंद सिन्हा ने कहा कि हमारे देश में राष्ट्रीय जागरण के अग्रदूतों और आजादी आंदोलन के नेताओं ने जिस शिक्षा व्यवस्था का सपना देखा था, उसमें केवल डिग्री प्राप्त करना ही नहीं था, बल्कि उसमें धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की आकांक्षा भी थी. लेकिन आजादी के दशकों बाद भी केंद्र सरकार सरकार की तरफ से लायी गयी नयी शिक्षा नीति हमारी शिक्षा व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने का साधन बन गयी है. उन्होंने यह बातें मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भूमिका तथा वैकल्पिक जन शिक्षा नीति 2025 को लेकर रविवार को आइएमए हॉल में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षा कन्वेंशन में कही. ऑल इंडिया सेव एजुकेशन कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर तरुण कांति नस्कर ने कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश की शिक्षा व्यवस्था को बाजार, पूंजीपतियों और संकीर्ण विचारधारा के हवाले कर देगी. यह नीति वंचितों और महिलाओं को शिक्षा से वंचित करेगी. इस दौरान पटना विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रोफेसर भारती एस कुमार ने कहा कि हर बच्चे को, चाहे वह किसी भी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से हो, समान शिक्षा मिलनी चाहिए. वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो आरएस आर्या ने कहा कि एनइपी 2020 में ””भारतीय ज्ञान प्रणाली”” के नाम पर शिक्षा को धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं की ओर धकेला जा रहा है. तिलका मांझी विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रो योगेंद्र ने कहा कि पहले से ही बजट और खर्च दोनों स्तर पर निरंतर कटौती की जा रही है. इस दौरान उच्च शिक्षा पर आयोजित पैनल डिस्कशन में एआइएफयूटीसीओ के महासचिव प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा कि शिक्षा किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की संपत्ति है. इसे प्राप्त करना हमारा अधिकार है. एनआइटी पटना के पूर्व प्राध्यापक संतोष कुमार और कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस के पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ सफदर इमाम कादरी ने भी अपनी बात रखी. स्कूली शिक्षा पर पैनल डिस्कशन के तहत आरटीइ के बिहार राज्य संयोजक अनिल कुमार राय एवं अन्य ने भी संबोधित किया. कन्वेंशन में जन शिक्षा नीति 2025 पेश की गयी. इसके बारे में कहा गया कि लोकतांत्रिक, समावेशी और वैज्ञानिक शिक्षा प्रणाली की नींव रखने वाली यह जन शिक्षा नीति देश के सभी नागरिकों को समान अवसर देगी. कमेटी का गठन शिक्षा आंदोलन को तेज करने कन्वेंशन के जरिये एक कमेटी का गठन किया गया. प्रो ओ पी जायसवाल, प्रो धर्मेंद्र कुमार, व्यास और प्रोफेसर आइएस आर्य को संरक्षक बनाते हुए प्रो संतोष कुमार को अध्यक्ष बनाया गया. अध्यक्ष मंडल में प्रो सच्चिदानंद सिन्हा, डॉ योगेंद्र, प्रो सफदर इमाम कादरी और प्रो अरुण कुमार रखे गये. भारती एस कुमार, डॉ अनिल कुमार राय, नवेंदु प्रियदर्शी, कपिल देव, लाल कुमार, कौशल किशोर सिंह, साधना मिश्रा, विजय कुमार जायसवाल, अविनाश कुमार झा और डॉ हैदर को उपाध्यक्ष चुना गया, जबकि रामप्रीत राय को सचिव तथा शशि भूषण चौधरी को सहसचिव चुना गया.

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Published by: Rakesh ranjan

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