बक्सर-भागलपुर कॉरिडोर का मेन हिस्सा बनेगा यह एक्सप्रेस-वे, दो पुल भी बनाये जायेंगे, देखें लेटेस्ट अपडेट

Mokama-Munger Fourlane: मोकामा-मुंगेर फोरलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के बन जाने से बिहार के विकास को रफ्तार मिलेगी. इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को लेकर नया अपडेट आया है. जल्द इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू होने वाला है.

Mokama-Munger Fourlane: मोकामा-मुंगेर फोरलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट पर काम काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है. लगभग 4447 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाली यह 82.4 किलोमीटर लंबी सड़क इस पूरे इलाके की तस्वीर बदल देगी. इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि यह एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है. यह पुरानी सड़क को चौड़ा करने के बजाय बिल्कुल नए रास्ते से गुजरेगी.

जमीन अधिग्रहण की तैयारी पूरी

लखीसराय के डीसीएलआर राहुल कुमार ने बताया कि इस एक्सप्रेस-वे के लिए 60 मीटर चौड़ी जमीन अधिगृहित की जानी है. लखीसराय जिले के 5 अलग-अलग प्रखंडों (बड़हिया, लखीसराय, चानन, पिपरिया और सूर्यगढ़ा) के कुल 48 मौजों की जमीन इसके दायरे में आ रही है. प्रशासन ने अब तक 46 मौजों की जमीन से जुड़ा डेटा एनएचएआई को भेज दिया है. 28 फरवरी तक जमीन के फिजिकल वेरिफिकेशन का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि किसानों को उनके हक का मुआवजा देकर निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जा सके.

सफर होगा छोटा और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

इस एक्सप्रेस-वे के बन जाने के बाद मुंगेर और मोकामा के बीच की दूरी तय करने में लगने वाला समय करीब डेढ़ घंटा कम हो जाएगा. यह सड़क बक्सर-भागलपुर कॉरिडोर का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है. इससे न केवल पटना से मुंगेर जाना आसान होगा, बल्कि बिहार और झारखंड के बीच व्यापार भी बढ़ेगा. बेहतर सड़क से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे.

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ब्लॉक वाइज जमीन का ब्यौरा

प्रशासन ने बताया कि सबसे ज्यादा जमीन सूर्यगढ़ा के 18 मौजों से 139.97 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी. इसके अलावा बड़हिया के 8 मौजों से लगभग 78.71 हेक्टेयर और लखीसराय के 9 मौजों से 76.29 हेक्टेयर जमीन ली जानी है. चानन और पिपरिया प्रखंडों की जमीन भी इस परियोजना में शामिल है.

डीएम खुद इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं ताकि कागजी कार्रवाई में कोई देरी न हो. इस एक्सप्रेस-वे के साथ-साथ दो बड़े पुलों का निर्माण भी प्रस्तावित है. इससे यात्रा सुरक्षित और सुगम होगा. जैसे ही जमीन अधिग्रहण का काम पूरा होगा, एनएचएआई टेंडर प्रक्रिया के जरिए निर्माण शुरू करा देगा.

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Published by: Paritosh Shahi

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