Anganwadi Centres In Bihar : (सविता की रिपोर्ट) बिहार के आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी अब और सख्त होगी. केन्द्रों में अब सिर्फ बच्चों की पढ़ाई और पोषाहार बांटने तक ही काम सीमित नहीं रहेगा. केन्द्र की व्यवस्था कैसी है, बच्चों को समय पर पोषाहार मिल रहा है या नहीं, भोजन की गुणवत्ता कैसी है और टीकाकरण से लेकर स्वास्थ्य जांच तक की स्थिति क्या है. अब इन सवालों का जवाब स्थानीय स्तर पर भी देना होगा. इसके लिए विभाग ने नयी पहल की है. अब आंगनबाड़ी केन्द्रों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए समाज कल्याण विभाग ने हर आंगनबाड़ी केन्द्र में प्रबंधन समिति यानी आंगनबाड़ी विकास समिति की अनिवार्य कर दी है. हर केन्द्र पर कम से कम दो महीने में एक बार बैठक करनी होगी. विभाग ने इस संबंध में सभी जिलों को पत्र भेज दिया है.
खास बात यह है कि बैठक में केवल विभागीय कर्मी ही नहीं, बल्कि स्थानीय वार्ड सदस्य, सेविका, सहायिका और केन्द्र से जुड़े लाभार्थी भी शामिल होंगे. यानी आंगनबाड़ी केन्द्र की व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों की भागीदारी भी बढ़ेगी. सरकार की इस पहल का मकसद आंगनबाड़ी केन्द्रों के कामकाज में पारदर्शिता लाने के साथ स्थानीय लोगों को निगरानी व्यवस्था से जोड़ना है.
थाली में क्या मिल रहा है, अब इस पर भी होगी बात
आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं को मिलने वाले पोषाहार की गुणवत्ता बैठक का अहम मुद्दा होगी. टेक होम राशन और केन्द्र पर मिलने वाले गर्म पके भोजन की स्थिति की समीक्षा की जायेगी. बैठक में यह देखा जायेगा कि लाभार्थियों को तय व्यवस्था के अनुसार पोषाहार मिल रहा है या नहीं. भोजन की गुणवत्ता में कोई कमी है या लाभार्थियों की ओर से किसी तरह की शिकायत सामने आती है, तो उस पर चर्चा की जा सकेगी.
यानी अब आंगनबाड़ी केन्द्र की बैठक केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहेगी. केन्द्र पर मिलने वाली सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर भी सवाल-जवाब होंगे.
बच्चों की उपस्थिति से टीकाकरण तक का होगा हिसाब
बैठक में आंगनबाड़ी केन्द्र आने वाले बच्चों की दैनिक उपस्थिति की भी समीक्षा की जायेगी. इसके साथ टीकाकरण अभियान और बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच से जुड़े आंकड़ों को देखा जायेगा. किस बच्चे को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला और कहां कमी रह गयी, इस पर भी चर्चा की जा सकेगी.
पानी, शौचालय-साफ-सफाई की भी होगी पड़ताल
आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी समिति नजर रखेगी. बैठक में पेयजल, शौचालय, बिजली और साफ-सफाई की स्थिति पर चर्चा होगी. यदि किसी केन्द्र में इन सुविधाओं की कमी है तो उसे बैठक में दर्ज किया जा सकेगा और संबंधित स्तर पर समाधान के लिए मामला भेजा जायेगा. इससे केन्द्रों में बच्चों के लिए बेहतर और सुरक्षित माहौल तैयार करने पर जोर रहेगा.
सेविका दर्ज करेंगी पूरी कार्यवाही
प्रबंधन समिति की बैठक की अध्यक्षता स्थानीय वार्ड सदस्य या नामित अध्यक्ष करेंगे, जबकि आंगनबाड़ी सेविका सचिव के रूप में बैठक की पूरी कार्यवाही संभालेंगी. बैठक में हुई चर्चा, सामने आयी समस्याओं और लिये गये निर्णयों को रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा. इसके बाद बैठक की रिपोर्ट बाल विकास परियोजना अधिकारी यानी सीडीपीओ कार्यालय को भेजी जायेगी. इस व्यवस्था से विभाग के पास केन्द्र स्तर पर हुई बैठकों और फैसलों का रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा.
विकास के पैसे का भी देना होगा हिसाब
आंगनबाड़ी केन्द्र के विकास कोष से होने वाले खर्च और वित्तीय लेन-देन को भी समिति की बैठक में रखा जायेगा. विकास कोष की राशि किस काम में खर्च हुई और आगे किन कामों के लिए राशि की जरूरत है, इस पर समिति की सहमति ली जायेगी. इससे केन्द्रों के विकास के लिए उपलब्ध राशि के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर निगरानी मजबूत करने की कोशिश होगी.
आंगनबाड़ी की पूरी व्यवस्था की होगी समीक्षा
सरकार की इस पहल को सिर्फ नियमित बैठक कराने की व्यवस्था के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. इसका सीधा असर आंगनबाड़ी केन्द्रों के रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ सकता है. पोषाहार, बच्चों की उपस्थिति, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं अब समिति के सामने उठायी जा सकेंगी.
हर दो महीने में बैठक होने से छोटी समस्याओं को लंबे समय तक टालना भी मुश्किल होगा. स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ने से विभाग को जमीनी स्थिति की जानकारी मिलने की उम्मीद है. अब देखना होगा कि जिलों में इस व्यवस्था को कितनी गंभीरता से लागू किया जाता है और नियमित बैठकों के बाद आंगनबाड़ी केन्द्रों की व्यवस्था में कितना बदलाव आता है.
