Indian Railways: पटना जंक्शन से सफर करने वाले यात्रियों को राहत दी गई है. रेलवे की ओर से फैसला लिया गया है कि कम स्पीड वाली ट्रेनों में सुपरफास्ट के नाम पर अधिक सरचार्ज नहीं लिया जाएगा. रेलवे बोर्ड के आदेश पर पूर्व मध्य रेलवे ने इसका निर्देश वाणिज्य विभाग (Department of Commerce) को जारी कर दिया है. इससे यात्रियों को 15 से 75 रुपए तक का फायदा होगा.
इस वजह से हटाया गया सुपरफास्ट चार्ज
जानकारी के मुताबिक, औसतन 55 किलोमीटर प्रति घंटे से कम स्पीड वाली ट्रेनों का सुपरफास्ट का दर्जा रेलवे ने हटा दिया है. इनमें हावड़ा-देहरादून, कुंभ एक्सप्रेस समेत चार ट्रेनें शामिल हैं. रेलवे के इस फैसले से स्लीपर से लेकर एसी तक के यात्रियों को फायदा मिलेगा. साथ ही अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन लेट होने के कारण सुपरफास्ट का दर्जा हटाने का निर्णय लिया गया है.
कितना कम होगा ट्रेन का किराया?
सुपरफास्ट का दर्जा हटने से 5 से 12 प्रतिशत तक किराया कम हो जाएगा. जानकारों का कहना है कि जिन ट्रेनों का सुपरफास्ट का दर्जा हटता है, तो उसकी यात्रा अवधि बढ़ जाती है. जबकि रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि सुपरफास्ट सरचार्ज के एवज में यात्रियों से मूल किराए से लिए जाने वाले स्लीपर में 30 रुपए (8 प्रतिशत), एसी-2 और एसी-3 में 45 रुपए (4 प्रतिशत), एसी-1 में (2 प्रतिशत) और जेनरल क्लास में 15 रुपए (10 से 12 प्रतिशत) कम कर दिए गए हैं.
इन ट्रेनों से हटाया गया सुपरफास्ट का दर्जा
- विभूति एक्सप्रेस
- उपासना एक्सप्रेस
- कुंभ एक्सप्रेस
- हिमगिरी एक्सप्रेस
रेलवे बोर्ड के साथ बैठक में क्या हुआ?
जानकारी के मुताबिक, हाल ही में संसद की एक समिति ने ट्रेनों की स्पीड को लेकर रेलवे बोर्ड के साथ बैठक की थी. इसमें बताया गया था कि दिल्ली-हावड़ा और हावड़ा-देहरादून, जम्मू रूट पर कई ऐसी ट्रेनें हैं, जो कागजों में सुपरफास्ट के रफ्तार में दौड़ रही हैं. लेकिन ये हकीकत में रेलवे के 55 किलोमीटर प्रति घंटे के तय मानक पर खरा नहीं उतर पा रही हैं.
अब ये ट्रैक पर साधारण मेल एक्सप्रेस की तरह ही चलती हैं, जबकि इससे अधिक किराया देने के बाद भी यात्री परेशान रहते हैं. इसको देखते हुए रेलवे पूर्व मध्य रेल के अलावा देश के सभी 17 जोन में कुल 900 ट्रेनों की समीक्षा करा रहा है, जिसके बाद या तो ट्रेनों की स्पीड तय मानक से अधिक हो जायेगी या फिर किराया कम किया जाएगा.
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