Patna News: पटना के रहने वाले प्रोफेसर संजीवधारी सिन्हा पिछले 14 वर्षों से एक ऐसी कानूनी और प्रशासनिक भूलभुलैया में फंसे हैं, जहां उनके पास पासपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट और दूतावास के पत्र जैसे ठोस सबूत तो हैं, लेकिन सिस्टम उन्हें ‘जीवित’ और ‘उपस्थित’ मानने को तैयार नहीं दिख रहा.
क्या है पूरा मामला?
प्रोफेसर सिन्हा का दावा है कि उनके पास 2014 से लेकर 2021 तक की विभिन्न सरकारी डिक्रियां और कमेटियों की रिपोर्ट मौजूद हैं, जो उनकी सेवा को प्रमाणित करती हैं. इसके बावजूद, उनके 39 महीनों के बकाया वेतन में से मात्र 21 महीनों का भुगतान किया गया.
प्रोफेसर सिन्हा ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े दस्तावेजों, भारतीय दूतावास के पत्रों और एनओसी (NOC) के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, उसे प्रशासनिक स्तर पर ‘लापता’ या ‘अवैध’ साबित करने की कोशिशें की गईं. उनके पास डोमिसाइल, बैंक स्टेटमेंट, पासपोर्ट, एनओसी, कमेटी रिपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज जैसे ठोस सबूत मौजूद हैं. इसके बावजूद उन्हें कई बार “लापता” या “अवैध” करार देने की कोशिश की गई.
प्रोफेसर का कहना है कि वे लगातार लेखन, शोध, कोचिंग और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में सक्रिय रहे, फिर भी उनकी फाइलों को एक टेबल से दूसरे टेबल तक टालमटोल का शिकार बनाया जाता रहा.
बिजली-पानी काटने की धमकी और कानूनी प्रहार
प्रोफेसर संजीवधारी सिन्हा के लिए यह लड़ाई सिर्फ दफ्तरों तक सीमित नहीं रही. उनका आरोप है कि उन्हें डराने-धमकाने के लिए बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं काटने की धमकियां दी गईं. वे कहते हैं कि यह महज एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि श्रम अधिकारों का सीधा उल्लंघन है.
विदेश में फंसे होने के कारण उनकी आवाज अक्सर दब जाती है, लेकिन अब उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय, अटॉर्नी जनरल और न्याय मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया है. उनका सवाल है जब उनके पासपोर्ट में बाहर जाने की कोई अवैध एंट्री नहीं है और मंत्रालय उनके संपर्क में हैं, तो फिर उन्हें न्याय के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है?
अंतरराष्ट्रीय छवि पर उठते गंभीर सवाल
प्रोफेसर सिन्हा ने चेतावनी दी है कि यदि उनके मामले में निष्पक्ष जांच कर बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो यह भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी एक बदनुमा दाग होगा.
उनकी उम्मीदें दिल्ली और पटना के उन गलियारों पर टिकी हैं, जहां उनकी फाइलें बरसों से धूल फांक रही हैं. उन्हें ‘गुमशुदा फाइल’ के बजाय एक संघर्षशील नागरिक मानकर जल्द इंसाफ देगी.
(फुलवारी शरीफ से अजीत की रिपोर्ट)
