पटना का हरिलाल मिठाई कारखाना होगा बंद, मिथिला डेयरी का प्लांट भी होगा क्लोज, जानिए क्या है वजह

Patna Harilal Factory : पटना की हरिलाल की मिठाई फैक्ट्री प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने पर बंद होने की कगार पर है. अनुपचारित गंदा पानी नाले में बहाने का आरोप है. इसी तरह दरभंगा की मिथिला डेयरी पर भी कार्रवाई की गई है.

Patna Harilal Factory : पटना के पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र स्थित हरिलाल की मिठाई बनाने वाली फैक्ट्री पर प्रदूषण नियमों के उल्लंघन के मामले में बंदी की कार्रवाई शुरू की जा रही है. निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री में बहिःस्राव उपचार संयंत्र संचालित नहीं मिला और अनुपचारित गंदा पानी पास के नाले में बहाया जा रहा था. केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की संयुक्त जांच के बाद कार्रवाई की अनुशंसा की गयी.

पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्री पर कार्रवाई

पटना के पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र स्थित मेसर्स हरिलाल वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की इकाई में प्रदूषण नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है. जांच के बाद बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने जल प्रदूषण से जुड़े प्रावधानों के तहत इकाई को बंद करने की कार्रवाई शुरू की है.

बिना उपचार का गंदा पानी नाले में छोड़ने का आरोप

निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री का बहिःस्राव उपचार संयंत्र संचालित नहीं पाया गया. इसके बाद टीम ने देखा कि फैक्ट्री से निकलने वाला अनुपचारित गंदा पानी बगल के नाले में बहाया जा रहा था. निरीक्षण टीम ने इसे पर्यावरण नियमों का उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की.

केंद्रीय और राज्य प्रदूषण बोर्ड की टीम ने की जांच

पटना स्थित हरिलाल की इकाई समेत संबंधित औद्योगिक इकाइयों की जांच केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा नियुक्त थर्ड पार्टी एजेंसी आइआइटी खड़गपुर के संयुक्त निरीक्षण में हुई. जांच का उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले बहिःस्राव और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की स्थिति देखना था.

जल अधिनियम के तहत बंदी की प्रक्रिया

हरिलाल वेंचर्स के खिलाफ जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है. प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की ओर से निरीक्षण रिपोर्ट और अनुशंसा के आधार पर यह प्रक्रिया शुरू की गयी है.

100 किलो प्रतिदिन से अधिक बीओडी वाली इकाइयों की जांच

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 100 किलो प्रतिदिन से अधिक बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड यानी बीओडी वाला बहिःस्राव छोड़ने वाली या परिसंकटमय पदार्थों की हैंडलिंग करने वाली औद्योगिक इकाइयों को अतिप्रदूषणकारी उद्योगों की श्रेणी में रखा है. ऐसी इकाइयों की जांच अग्रणी विशेषज्ञ तकनीकी संस्थाओं और राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की संयुक्त टीम द्वारा की जाती है.

सालाना निरीक्षण में सामने आते हैं पर्यावरणीय मानक

अतिप्रदूषणकारी श्रेणी में आने वाली औद्योगिक इकाइयों की पर्यावरणीय स्थिति की नियमित जांच की व्यवस्था है. इसी प्रक्रिया के तहत हरिलाल की पटना इकाई का भी निरीक्षण किया गया. जांच में बहिःस्राव उपचार व्यवस्था से जुड़ी कमियां सामने आने के बाद कार्रवाई की अनुशंसा की गयी.

दरभंगा की मिथिला डेयरी पर भी कार्रवाई

इसी निरीक्षण प्रक्रिया में दरभंगा स्थित मेसर्स मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड की इकाई में भी नियमों के उल्लंघन की बात सामने आयी. वहां बहिःस्राव उपचार संयंत्र ठीक से काम करता नहीं पाया गया. निरीक्षण दल के अनुसार अनुपचारित बहिःस्राव को बोरवेल के जरिये जमीन के भीतर डाला जा रहा था.

अब प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की कार्रवाई पर नजर

पटना में हरिलाल की इकाई के मामले में बंदी की प्रक्रिया शुरू होने के बाद आगे की कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के स्तर पर होगी. निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आयी कमियों और जल प्रदूषण से जुड़े उल्लंघनों के आधार पर विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ायी जा रही है.

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By साक्षी कुमारी

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