हर घर नल जल योजना: बिहार में अब पानी की बर्बादी रोकने सेंसर का इस्तेमाल, स्काडा सिस्टम से गुणवत्ता की होगी जांच...

पटना: मुख्यमंत्री हर घर नल जल योजना के तहत 56079 वार्डो में शुद्ध पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी पीएचडीइ को दी गयी है. जिसमें 70% काम पूरा हो चुका है और अक्तूबर तक सभी बाकी बचे वार्डो में काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. वहीं, विभाग ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए स्काडा सिस्टम से निगरानी करने का निर्णय भी लिया है. जिसका काम सितंबर तक पूरा हो जायेगा.

पटना: मुख्यमंत्री हर घर नल जल योजना के तहत 56079 वार्डो में शुद्ध पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी पीएचडीइ को दी गयी है. जिसमें 70% काम पूरा हो चुका है और अक्तूबर तक सभी बाकी बचे वार्डो में काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. वहीं, विभाग ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए स्काडा सिस्टम से निगरानी करने का निर्णय भी लिया है. जिसका काम सितंबर तक पूरा हो जायेगा.

क्या है स्काडा सिस्टम

स्काडा सिस्टम में कंप्यूटर पर योजना के तहत कहां कितने फोर्स में पानी जा रहा है. पानी में कोई खराबी या गुणवत्ता की कमी तो नहीं है. इसकी पूरी जांच कंप्यूटर स्क्रीन के माध्यम से हो जायेगी.जिससे पता लगाना आसान होगा कि किस वार्ड में पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है या हो चुकी है.

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लगेगा सेंसर

योजना के तहत प्रति व्यक्ति 70 लीटर पानी देना है. लेकिन हाल में हुई विभागीय समीक्षा में यह बात सामने आयी है कि लोग पानी बर्बाद कर रहे हैं. इस कारण ने सेंसर लगाने की योजना बनायी है, ताकि हर व्यक्ति को उतना ही पानी मिले, जितना उनको देना है. इसके लिए हर घर में व्यक्ति की गिनती होगी. उसके बाद सेंसर के माध्यम से उस घर का पानी आटोमेटिक बंद हो जायेंगा. इसके लिए विभाग ने अन्य राज्यों से भी संपर्क किया है, जहां पहलें से सेंसर लगा हुआ है.

लाकडाउन में 30 लाख घरों में पहुंचा पानी

मुख्यमंत्री के दिशा निर्देश पर पीएचइडी ने नल जल योजना के तहत अक्तूबर तक सभी वार्डो में शुद्ध पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित है. विभाग के मुताबिक लाकडाउन में सोशल डिसटेनसिग के तहत तेजी से काम किया गया है और 30 लाख से अधिक घरों में पानी पहुंचाया गया है.काम के दौरान कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए हर इंतजाम किया गया है, ताकि काम की रफ्तार धीमी नहीं हो.

गुणवत्ता प्रभावित जिले , यहां काम करने में हो रही है परेशानी

– फ्लोराइड: रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, गया, नवादा, नालंदा, मुंगेर, शेखपुरा, जमुई, बांका एवं भागलपुर

– आरआर्सेनिक : बक्सर, भोजपुर, पटना, वैशाली, सीतामढ़ी, सारण, समस्तीपुर, दरभंगा, भागलपुर, मुंगेर, कटिहार, बेगूसराय, खगड़िया, एवं कटिहार

– आयरन : बेगूसराय, खगड़िया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, दरभंगा, मुंगेर एवं भागलपुर.

यह है योजना

योजना के तहत कुल वार्ड 56079 है. इसमें लगभग 30 हजार वार्ड गुणवत्ता प्रभावित हैं. जिसमें फ्लोराइड 3814, आयरन 21598 और आर्सेनिक 5058 वार्ड शामिल है.

अक्तूबर तक सभी वार्डो में काम पूरा हो जायेगा

योजना की रफ्तार तेज है. अक्तूबर तक सभी वार्डो में काम पूरा हो जायेगा.पानी की गुणवत्ता और बर्बादी को रोकने के लिये कुछ नयी तकनीक का सहारा लिया जायेगा.विनोद नारायण झा, मंत्री,पीएचइडी.

Posted by : Thakur Shaktilochan Shandilya

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