बिहार के इतिहास में शोध को लेकर विदेशी विद्वानों को मिलेगा अनुकूल वातावरण : डॉ एस सिद्धार्थ

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से मंगलवार को बिहार राज्य अभिलेखागार निदेशालय पटना की ओर से संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

संव���ददाता, पटना मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से मंगलवार को बिहार राज्य अभिलेखागार निदेशालय पटना की ओर से संगोष्ठी का आयोजन किया गया. अभिलेखागार निदेशालय के अभिलेख निदेशक डॉ मो फैसल अब्दुल्लाह ने अतिथियों का स्वागत किया. शोध के क्षेत्र में भारत व अमेरिका के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिहार के इतिहास में 50 दशक से ही अमेरिकी इतिहासकारों की गहरी दिलचस्पी रही है. विशेष रूप से वाल्टर हाउजर, जिन्होंने स्वामी सहजानंद सरस्वती पर पीएचडी की थी. तब से अमेरिकी इतिहासकारों की लंबी शृंंखला बिहार के इतिहास पर शोध करती रही है. मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ एस सिद्धार्थ ने व्याख्यान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिहार के इतिहास में शोध को लेकर विदेशी विद्वानों के बीच अनुकूल वातावरण तैयार करेगा. इसी क्रम में विलयिम पिंच अभिलेखागार पहुंचे. प्रो विलियम आर पिंच ने कहा कि पहली बार अपने शोध कार्य को लेकर बिहार राज्य अभिलेखागार आये थे, तब से यह सिलसिला जारी है. 1857 की क्रांति पर एक अलग दृष्टिकोण के साथ अध्ययन की जरूरत है. विशेष रूप से महिलाओं की भूमिका को लेकर 1857 की क्रांति की विद्रोह की चर्चा करते हुए कहा कि मेरठ से लेकर बिहार में विद्रोह में महिलाओं ने विशेष योगदान दिया है. मंच का संचालन डॉ भारती शर्मा व धन्यवाद ज्ञापन डॉ रश्मि किरण ने किया. मौके पर प्रो वेंडीसिंगी, प्रो माइकल हाउजर, प्रो ऐलिजाबेथ हाउजर, शीला हाउजर, रोजमेरी हाउजर जौस, ऐरन लिन, कैलाश चंद्र झा, डॉ सत्यजीत सिंह, सहायक अभिलेख निदेशक उदय कुमार ठाकुर, रामकुमार सिंह, डॉ शारदा शरण समेत अन्य मौजूद रहे.

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Published by: Anurag pradhan

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