Ford Hospital: नवादा की 35 साल की शमा परवीन (बदला हुआ नाम) लंबे समय से सर्वाइकल फाइब्रॉइड की गंभीर समस्या से जूझ रही थीं. उनके गर्भाशय के निचले हिस्से में गांठ विकसित हो गई थी, जिसके कारण लगातार ब्लीडिंग और पेशाब के रुक-रुक कर आने जैसी परेशानियां बढ़ती जा रही थीं. स्थिति दिन-ब-दिन जटिल होती जा रही थी, जिससे मरीज और उनके परिजन काफी चिंतित थे. इसी बीच परिजन उन्हें फोर्ड हॉस्पिटल,पटना लेकर पहुंचे, जहां वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जागृति भारद्वाज से परामर्श लिया गया.
जांच के बाद पता चला कि गांठ बेहद संवेदनशील स्थान पर थी, जो पेशाब की थैली (ब्लैडर) और पेशाब की नली (यूरेटर) के बेहद करीब स्थित थी. यही वजह थी कि अन्य अस्पतालों में इस केस के लिए ओपन सर्जरी की सलाह दी गई थी, क्योंकि ऑपरेशन के दौरान इन अंगों को क्षति पहुंचने का खतरा अधिक रहता है.
लेकिन, डॉ. जागृति भारद्वाज ने अपनी टीम डॉ. अनीता सिंह और एनेस्थेटिस्ट डॉ. तूलिका के सहयोग से आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए सफलतापूर्वक दूरबीन (लैप्रोस्कोपिक) सर्जरी की. सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रही हैं.
डॉ. भारद्वाज ने बताया कि इस तरह का सर्वाइकल फाइब्रॉइड केवल 1-2 प्रतिशत मरीजों में ही देखने को मिलता है, इसलिए यह केस काफी चुनौतीपूर्ण था.सर्जरी के दौरान अत्यंत सावधानी बरतते हुए बिना ब्लैडर और यूरेटर को नुकसान पहुंचाए गांठ को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया.यह सफलता आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञ टीम के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है.
