धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर BJP-RJD आमने-सामने, आरजेडी बोली- छात्र शक्ति की जीत

Dharmendra Pradhan: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बिहार का राजनीतिक पारा चढ़ गया है. सत्ताधारी जेडीयू और बीजेपी इसे धर्मेंद्र प्रधान का छात्रों के प्रति सम्मान और समर्पण बता रही है. मुख्य विपक्षी दल आरजेडी इसे बिहार के उग्र छात्र आंदोलन और लोकतंत्र की बड़ी जीत करार दे रहा है.

Dharmendra Pradhan: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के अचानक इस्तीफा देने के बाद बिहार की राजनीति में जबरदस्त बयानबाजी शुरू हो गई है. राज्य के दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों एनडीए और महागठबंधन ने इस पूरे घटनाक्रम पर एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रुख अपनाया है. एक तरफ जहां एनडीए घटक दल इसे शिक्षा मंत्री के समर्पण और छात्र-हित का कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे बिहार समेत पूरे देश में हुए छात्र आंदोलनों का दबाव मान रहा है.

जेडीयू और बीजेपी बोली- समर्पण और सम्मान का फैसला, झुकी नहीं है सरकार

बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनका कार्यकाल केवल एक प्रशासनिक पद नहीं था, बल्कि शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का विजन था. छात्र राजनीति से जुड़े रहने के कारण वे युवाओं की समस्याओं को समझते थे.

जेडीयू प्रवक्ता अंजुम आरा ने स्पष्ट किया कि एनडीए सरकार हमेशा युवाओं के हित में फैसले लेती है. धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों का सम्मान करते हुए इस्तीफा दिया है और विपक्ष का यह कहना कि सरकार झुक गई है, पूरी तरह बेबुनियाद है.

आरजेडी का हमला- 'यह छात्रों के लाठी खाने और लंबे संघर्ष की जीत है'

राष्ट्रीय जनता दल ने इस इस्तीफे को छात्र-युवा शक्ति और लोकतंत्र की जीत बताया है. आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव और चित्तरंजन गगन ने कहा कि बिहार में बंद और देशभर में छात्रों ने दमन व लाठीचार्ज का सामना किया, लेकिन पीछे नहीं हटे.

उसी जनदबाव के आगे सरकार को मजबूरन यह फैसला लेना पड़ा. उन्होंने मांग की कि आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए.

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केवल चेहरा बदलने से हल नहीं होगी समस्या: आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह

आरजेडी के MLC सुनील सिंह ने इस मामले पर आगे की राह को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के हटने तक सीमित नहीं है, क्योंकि परीक्षा प्रणाली में लंबे समय से कमियां रही हैं. केवल मंत्री बदलने या अधिकारियों को हटाने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि पुरानी परीक्षाओं की समीक्षा की जाए और पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं.

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लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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