सीबीएसइ : नये सत्र से सभी स्कूलों में होगी एंटी बुलिंग कमेटी

सीबीएसइ से एफिलिएटेड स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को तनाव मुक्त वातावरण में पढ़ाने के लिए सभी स्कूल की ओर से अलग से एंटी बुलिंग कमेटी बनायी जायेगी.

-क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी स्कूलों का करेंगे निरीक्षण

संवाददाता, पटना

सीबीएसइ से एफिलिएटेड स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को तनाव मुक्त वातावरण में पढ़ाने के लिए सभी स्कूल की ओर से अलग से एंटी बुलिंग कमेटी बनायी जायेगी. इससे

स्कूलों में उत्पीड़न की रोकथाम भी हो सकेगी. बोर्ड की ओर से सभी क्षेत्रीय कार्यालय को अपने क्षेत्र के स्कूलों में एंटी बुलिंग कमेटी के निर्माण और उसकी संचालन प्रक्रिया पर ध्यान रखने का निर्देश दिया है. बोर्ड की ओर से कहा गया है कि स्कूलों में गठित की जाने वाली इस कमेटी की निगरानी क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा की जायेगी. क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण करेंगे. इसके अलावा स्कूल परिसर में प्रमुख जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना भी अनिवार्य कर दिया गया है. स्कूल के मेन गेट, ग्राउंड, कॉरीडोर, लॉबी और वॉशरूम के बाहर कैमरे लगाने को लेकर निर्देश दिया गया है.

एनसीइआरटी की ओर से जारी की गयी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चे आपस में एक -दूसरे को चिढ़ाते और परेशान करते हैं. इसके बाद बच्चे तनाव में गलत कदम उठा लेते हैं. सीबीएसइ ने एनसीइआरटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक स्कूल में एंटी बुलिंग कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है. सीबीएसइ के सिटी को-ऑर्डिनेटर एसी झा ने बताया कि पहले से ही कई स्कूलों में एंटी बुलिंग कमेटी है. लेकिन इसकी संख्या कम है. अब हर स्कूल में एंटी बुलिंग कमेटी का गठन करना अनिवार्य है. इसमें कमेटी के सदस्य स्कूल में स्वस्थ वातावरण बनाने का प्रयास करते हैं. इसके तहत बच्चों में किसी तरह का भेद भाव न हो साथ ही डर-मुक्त, सकारात्मक और सम्मानजनक वातावरण बनाने में मदद मिलती है.

एंटी बुलिंग कमेटी न्यायपूर्ण मंच करेगी प्रदान

स्कूलों में एंटी बुलिंग कमेटी एक ऐसी समिति होगी, जिसका गठन स्कूल परिसर में बच्चों के बीच होने वाले उत्पीड़न की रोकथाम और उससे निबटने के लिए किया जायेगा. पीड़ित विद्यार्थियों को एक सुरक्षित और न्यायपूर्ण मंच प्रदान करेगी. कमेटी के सदस्य घटनाओं की तुरंत पहचान और समाधान करके माहौल को बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे. इसके साथ ही विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को जागरूक करेंगे. यह स्कूल परिसर को एक डर-मुक्त, सकारात्मक और सम्मानजनक वातावरण बनाने में मदद करेगी. कमेटी में प्रधानाचार्य या उनका प्रतिनिधि (समिति के अध्यक्ष के रूप में), वरिष्ठ शिक्षक, स्कूल काउंसलर और एक चिकित्सा अधिकारी शामिल होंगे. इसके अलावा कमेटी में विद्यार्थियों के प्रतिनिधि और अभिभावकों के प्रतिनिधि भी सदस्य शामिल रहेंगे.

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Published by: Amber md

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