Nitish Kumar: नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट लिखकर उनके 20 साल के कार्यकाल को याद किया. उन्होंने कहा कि 24 नवंबर 2005 सिर्फ एक तारीख नहीं थी, बल्कि बिहार के नए दौर की शुरुआत थी. उसी दिन से राज्य में बदलाव की नई कहानी शुरू हुई थी.
उस समय सबसे बड़ी चुनौती लोगों का टूटा भरोसा वापस लाना था
संजय झा ने लिखा कि जब नीतीश कुमार ने बिहार की कमान संभाली, तब सबसे बड़ी चुनौती लोगों का टूटा भरोसा वापस लाना था. राज्य में कानून-व्यवस्था कमजोर थी और व्यवस्था पर विश्वास कम हो गया था. नीतीश कुमार ने सबसे पहले कानून का राज स्थापित किया, जिससे लोगों में सुरक्षा की भावना लौटी.
उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में बिहार ने हर क्षेत्र में बदलाव देखा. सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में बड़े काम हुए. गांव-गांव तक सड़कें पहुंचीं, घर-घर बिजली पहुंची और हर घर नल का जल जैसी योजनाओं ने आम लोगों की जिंदगी आसान बनाई.
नीतीश कुमार की इन योजनाओं का किया जिक्र
संजय झा ने महिलाओं के लिए किए गए कामों को भी खास बताया. साइकिल योजना, पंचायतों में आरक्षण और जीविका जैसी योजनाओं ने लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया. इससे समाज में उनकी भागीदारी बढ़ी और उन्हें नई पहचान मिली.
उन्होंने यह भी कहा कि गया जी डैम जैसी परियोजनाओं ने सिंचाई और जल प्रबंधन को मजबूत किया. बेहतर सड़कें, मजबूत आधारभूत ढांचा और सुरक्षित माहौल ने बिहार को निवेश के लिए तैयार किया.
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स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा
संजय झा ने लिखा कि नीतीश कुमार का विकास मॉडल सिर्फ विकास तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें सामाजिक न्याय और सबको साथ लेकर चलने की सोच भी थी. उन्होंने हर वर्ग, हर समुदाय और हर तबके को साथ लेकर काम किया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार का यह दौर आधुनिक बिहार के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा. बिहार को निराशा से निकालकर उम्मीद की नई ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए राज्य हमेशा उनका आभारी रहेगा.
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