बिहार में कैंसर जांच अभियान ने बदली तस्वीर, गांव-गांव ‘सवेरा’ के उम्मीद की किरण

बिहार में सवेरा कैंसर हॉस्पिटल और R S मेमोरियल कैंसर सोसाइटी ने सरकार की स्वीकृति से कैंसर स्क्रीनिंग अभियान चलाकर नई उम्मीद जगाई है. अब तक 60 शिविरों में 6,000 से अधिक जांचें हुईं और कई मरीजों को इलाज मिला. यह पहल जागरूकता, समय पर पहचान और गरीबों को निःशुल्क इलाज सुनिश्चित कर जनआंदोलन का रूप ले चुकी है.

बिहार में पहली बार स्वास्थ्य सेवा का ऐसा जन अभियान देखने को मिला है जिसने गांव-गांव में नई उम्मीद जगाई है.  सवेरा कैंसर हॉस्पिटल ने R S मेमोरियल कैंसर सोसाइटी के सहयोग से कैंसर स्क्रीनिंग अभियान चलाकर जीवन बचाने की ऐतिहासिक पहल की है. बिहार सरकार और राज्य स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक स्वीकृति के साथ चल रहे इस अभियान के तहत अब तक राज्य के कई जिलों में 60 कैंप पूरे हुए है जिसमें 6,000 से अधिक लोगों की कैसर जांच की जा चुकी है और लगभग 325 लोगों में संदिग्ध होने की आशंका पाई गई. अभियान का उद्देश्य केवल जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद कैंसर की समय पर पहचान, जागरूकता बढ़ाना और गरीब मरीजों के लिए निःशुल्क और किफायती इलाज सुनिश्चित करना है. इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, रेफरल अस्पतालों और पांचों के सामुदायिक स्तरों पर स्क्रीनिंग कैंप लाए गए ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सीधे ग्रामीणों की पहुंच में आ सके. 

 कैंसर स्क्रीनिंग में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल

कैंसर जांच में अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है. स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए निरामई थर्मोलाइटिक्स जैसी बिना दर्द और बिना संपर्क वाली तकनीक का इस्तेमाल किया गया. गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच के लिए VLA (विजुअल इंस्पेक्शन विद एसीटिक एसिड) पद्धति अपनाई जा रही है. वहीं, मुंह और गले के कैंसर की पहचान के लिए विशेषज्ञ टीम ने लोगों की जांच कर जरूरतमंदों को तुरंत सवेरा कैंसर हॉस्पिटल रेफर किया, जिसमें अभी तक 7 लोग सर्जरी, 10 लोग कीमोथेरेपी और 6 लोग रेडिएशन जैसी चिकित्सा इताज का लाभ आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री राहत कोष और संस्थागत सहायता कार्यक्रमों के तहत ले चुके हैं. इस कैसर स्क्रीनिंग कैंप अभियान में S.B.I. फाउंडेशन और रोटरी पटना मिडटाउन भी सहयोग प्रदान करने की भूमिका निभा रही है.

 लोकलाज छोड़ ग्रामीण पहुंच रहे स्क्रीनिंग कराने

 इस पहल की असली ताकत केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उस जागरूकता में है, जो अब गांव-गांव तक पहुंच चुकी है. जिन बीमारियों का नाम सुनकर लोग पहले डरते और छुपाते थे, अब वह स्वयं जांच कराने के लिए आगे आ रहे हैं. जागरूकता बढ़ाने के लिए गांवों, स्कूलों और कॉलेजों में विशेष स्वास्थ्य शिक्षा सत्र आयोजित किए जा रहे हैं.  कैम्प स्थल पर भी विशेषज्ञ डॉक्टर और स्वास्थ्य कार्यकर्ता लोगों को कैंसर के शुरुआती लक्षणों, तंबाकू और नशे से होने वाले खतरों और रोकथाम के उपायों के बारे में विस्तार से समझा रहे हैं. इसके साथ ही, जीविका दीदी. आशा कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे अपने अपने गांव में स्वास्थ्य संदेशवाहक बनकर अधिक से अधिक लोगों तक यह संदेश पहुंचा सकें. प्रचार प्रसार में भी नई पहल की गई है.  ई-रिक्शा उद्‌घोषणा, पर्ने, बैनर पोस्टर और आशा-एनएम कार्यकर्ताओं की भागीदारी से लोगों को बड़ी संख्या में जोड़ा गया. 

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कैंसर के इलाज में पैसा ना आए आड़े

सवेरा कैंसर हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. वी.पी. सिंह ने कहा कि वो बिहार सरकार (स्वास्थ्य विभाग) का धन्यवाद करेंगे कि सरकार ने उनको गांव गांव जाने और लोगों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने का मौका दिया. हमारा संकल्प है कि बिहार का कोई भी मरीज केवल पैसों की कमी की वजह से इलाज से वंचित न रहे. ‘कैसर मुक्त बिहार का सपना तभी साकार होगा. जब हर गांव तक समय पर जांच, इलाज और जागरूकता पहुंचे. यह अभियान अब केवल एक चिकित्सा कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन आदोलन बन चुका है. इसने साबित किया है कि जब डॉक्टर, समाजसेवी संगठन और सरकार मिलकर काम करे तो कैंसर जैसी घातक बीमारी से भी जंग जीती जा सकती है.

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