चालू वित्तीय वर्ष भी दो अंकों में रहेगी बिहार की विकास दर

पिछले कई वर्षों से बिहार ने अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अपनी पहचान देश में तेज गति से विकास करने वाले राज्य के रूप में बनाई है.

संवाददाता,पटना

पिछले कई वर्षों से बिहार ने अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अपनी पहचान देश में तेज गति से विकास करने वाले राज्य के रूप में बनाई है. चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य की विकास दर के दो अंकों में रहने का अनुमान है. दरअसल, रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का आकलन है कि बिहार सहित देश के शीर्ष 18 राज्यों की विकास दर वित्तीय वर्ष 2024-25 में आठ से दस प्रतिशत के बीच रहेगी. चालू वित्त वर्ष में केंद्रीय कर हस्तांतरण में 12 से 13 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है जो अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कारक साबित होगा. साख निर्धारित करने वाली एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. इन 18 राज्यों का भारत के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 90 प्रतिशत योगदान है.बीते वित्त वर्ष 2023-24 में बिहार की विकास दर बिहार की विकास दर 10.98% रहा था.

विकास दर में बढ़ोतरी की मुख्य वजह

क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत जीएसटी संग्रह और केंद्र से वित्त के हस्तांतरण के कारण होगी, जो कुल राज्य राजस्व का करीब 50 प्रतिशत है. लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाए गए बिक्री कर तथा 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित अनुदानों का संग्रह भी इसमें शामिल है. राजस्व वृद्धि को सबसे अधिक प्रोत्साहन समग्र राज्य जीएसटी संग्रह और बेहतर कर अनुपालन तथा अर्थव्यवस्था को अधिक संगठित रूप देने से मिलेगा. केन्द्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी चालू वित्त वर्ष में 12 से 13 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है. वहीं, केंद्र से अनुदान चार से पांच प्रतिशत बढ़ेगा, जो बजट खर्च के अनुरूप है. रिपोर्टे के अनुसार राजस्व में सतत वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए, राज्यों को अपने राजस्व का विस्तार करने और संग्रह क्षमता में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा.

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By Prabhat Khabar News Desk

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