बिहार के गया जी समेत 7 जिलों में पत्थर खनन की तैयारी, रोहतास में 478 हेक्टेयर वन भूमि चिह्नित; जानें किन जिलों में शुरू होगी प्रक्रिया

बिहार के 7 जिलों में पत्थर खनन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. गया, शेखपुरा, बांका, औरंगाबाद, नवादा, कैमूर और रोहतास में खनन स्थल चिह्नित किये गये हैं. रोहतास में 478.33 हेक्टेयर वन भूमि खनन के लिए चिह्नित है.

पटना से कृष्ण कुमार की रिपोर्ट

Bihar stone mining : रोहतास जिले में पत्थर खनन को लेकर बड़ी तैयारी शुरू हो गयी है. जिले के 478.33 हेक्टेयर वन क्षेत्र को खनन के लिए चिह्नित किया गया है. जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन के अनुसार करबंदिया ब्लॉक-4 में 473 हेक्टेयर और गिजवाही ब्लॉक-3 में 5.33 हेक्टेयर वन क्षेत्र में पत्थर खनन की संभावना तलाशी गयी है. हालांकि, इन क्षेत्रों में खनन शुरू करने से पहले वन भूमि के गैर-वन उपयोग के लिए केंद्रीय मंजूरी लेनी होगी.

परिवेश पोर्टल पर भेजा जायेगा प्रस्ताव

वन भूमि को खनन के उपयोग में लाने के लिए केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा. इसके लिए संबंधित प्रस्ताव मंत्रालय के परिवेश पोर्टल पर भेजा जायेगा. प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभाग की ओर से कंसल्टेंट का चयन किया जायेगा. इसके लिए कोटेशन आमंत्रित किया गया है.

मंजूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा कंसल्टेंट

चयनित कंसल्टेंट परिवेश पोर्टल पर प्रस्ताव जमा कराने से लेकर उसकी प्रक्रिया की निगरानी करेगा. केंद्र सरकार की ओर से मांगी जाने वाली अतिरिक्त जानकारी, आपत्तियों और अन्य बिंदुओं का समय पर जवाब देने में भी कंसल्टेंट विभाग की मदद करेगा. इसी उद्देश्य से कंसल्टेंट के चयन से संबंधित सूचना विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है.

वन भूमि के बदले पूरी करनी होंगी कई शर्तें

वन भूमि को खनन के लिए इस्तेमाल करने की मंजूरी केवल जमीन की कीमत जमा कराने से नहीं मिलेगी. परियोजना से जुड़ी एजेंसी को नियमों के अनुसार क्षतिपूरक वनीकरण की व्यवस्था करनी होगी. इसके लिए उपयुक्त भूमि पर पेड़ लगाने का प्रावधान है. साथ ही वन भूमि से मिलने वाली पर्यावरणीय सेवाओं के नुकसान की भरपाई के लिए नेट प्रेजेंट वैल्यू यानी एनपीवी भी जमा करनी होगी. वन स्वीकृति की शर्तों के तहत क्षतिपूरक वनीकरण, उससे जुड़ी लागत और एनपीवी समेत अन्य देनदारियों का पालन करना होगा.

सात जिलों में चिह्नित किये गये पत्थर खनन स्थल

रोहतास के अलावा राज्य के कई अन्य जिलों में भी पत्थर खनन के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. नवादा के तुंगी वन क्षेत्र में पत्थर भूखंड को खनन के लिए तैयार करने की कवायद चल रही है. गया, शेखपुरा, बांका, औरंगाबाद, नवादा, कैमूर और रोहतास में पत्थर खनन के लिए स्थल चिह्नित किये गये हैं. संबंधित जिलों की जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट भी तैयार की जा चुकी है और विभिन्न विभागों से जरूरी मंजूरियां प्राप्त की गयी हैं.

अभी गया और शेखपुरा में ही हो रहा खनन

फिलहाल गया और शेखपुरा में चार स्थानों पर पत्थर खनन हो रहा है. अन्य बंदोबस्त पत्थर भूखंडों की अवधि समाप्त हो चुकी है. नये भूखंडों की बंदोबस्ती में देरी के कारण निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले स्टोन चिप्स की आपूर्ति के लिए झारखंड और पश्चिम बंगाल पर निर्भरता बढ़ गयी है.

खनन शुरू होने पर राजस्व और रोजगार बढ़ने की उम्मीद

रोहतास के चिह्नित वन क्षेत्रों में आवश्यक पर्यावरणीय और वन मंजूरियां मिलने के बाद खनन शुरू होने पर स्थानीय स्तर पर स्टोन चिप्स की उपलब्धता बढ़ सकती है. इससे निर्माण सामग्री की आपूर्ति बेहतर होने और निर्माण कार्यों की लागत कम होने की उम्मीद है. वहीं, राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नये अवसर भी पैदा हो सकते हैं.

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By विवेक सिंह

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