Bihar School Video Viral: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के दावों के बीच बगहा से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है. बगहा-2 प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय सुरवा बारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है.
इस वीडियो में गुरु-शिष्य की मर्यादा तार-तार होती दिख रही है. जहां बच्चों के हाथों में कलम और किताबें होनी चाहिए थीं, वहां वे अपनी प्रधानाध्यापिका को हाथ के पंखे से हवा झलते और स्कूल परिसर में कुदाल चलाते नजर आ रहे हैं. इस हृदयविदारक दृश्य ने अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है.
वायरल वीडियो की पूरी सच्चाई
वायरल हो रहे वीडियो में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कुमारी मालती क्लासरूम में कुर्सी पर आराम से बैठी हुई हैं और मोबाइल फोन पर बातचीत में मशगूल हैं. उनके आसपास दो नन्हीं छात्राएं खड़ी हैं, जो बारी-बारी से हाथ वाले पंखे से मैडम को हवा कर रही हैं.
बात यहीं खत्म नहीं होती, एक अन्य वीडियो में स्कूल ड्रेस पहने एक मासूम छात्र हाथ में भारी-भरकम कुदाल लेकर मिट्टी खोदता और काम करता दिखाई दे रहा है. वीडियो में अन्य शिक्षक भी पास की कुर्सियों पर मूकदर्शक बने बैठे नजर आ रहे हैं.
प्रधानाध्यापिका की अजीब सफाई- बच्चे खुद पंखा झलने लगे थे
मामला तूल पकड़ते ही प्रधानाध्यापिका कुमारी मालती ने अपना बचाव करते हुए एक चौंकाने वाली सफाई दी है. उनका कहना है कि यह वीडियो करीब एक साल पुराना है. मैडम का दावा है कि उस समय वह किसी जरूरी काम से वरीय अधिकारियों से फोन पर बात कर रही थीं और बच्चियां अपनी मर्जी से पंखा झलने लगी थीं.
उन्होंने यह भी कहा कि बाद में उन्होंने बच्चियों को डांटा और दोबारा ऐसा न करने की हिदायत दी. वीडियो में उनकी बॉडी लैंग्वेज और हाथ में कुदाल लिए छात्र के दृश्य इन दावों को झुठलाते नजर आ रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस स्कूल में बच्चों से मजदूरी कराना एक आम बात बन गई है.
बीईओ ने दिए जांच और कार्रवाई के आदेश
बगहा-2 के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) फूदन कुमार राम ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो के माध्यम से मिली जानकारी विचलित करने वाली है. शिक्षा विभाग ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं.
बीईओ ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों से किसी भी प्रकार का शारीरिक श्रम कराना या उन्हें अपनी निजी सेवा में लगाना कानूनन अपराध है और विभागीय नियमों का उल्लंघन है. जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रधानाध्यापिका और दोषी पाए जाने वाले अन्य शिक्षकों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी. (इनपुट: इजरायल अंसारी)
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