Bihar Next CM: बिहार की राजनीति में एक युग का अंत हो रहा है और नए दौर की शुरुआत हो रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब पटना की गद्दी छोड़कर दिल्ली यानी केंद्र की राजनीति में जाने का मन बना लिया है. उन्होंने राज्यसभा के लिए अपना पर्चा भर दिया है. इसका सीधा मतलब है कि अब बिहार में सत्ता की चाबी पहली बार पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी के हाथों में आने वाली है.
क्या है सबसे बड़ा सवाल
मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? बीजेपी अपने चौंकाने वाले फैसलों के लिए जानी जाती है. इस बार जो नाम चर्चा में हैं, उन्होंने सबको हैरान कर दिया है. सीएम की इस रेस में चार दिग्गज नेताओं के नाम सबसे आगे चल रहे हैं- सम्राट चौधरी, दिलीप जायसवाल, नित्यानंद राय और संजीव चौरसिया. ये चारों नेता ओबीसी समुदाय से आते हैं.
जातीय गणित का खेल
बिहार की राजनीति में जाति फैक्टर हमेशा से हावी रहा है. सम्राट चौधरी कोइरी समाज से आते हैं. इनका राज्य में बड़ा वोटबैंक है. नित्यानंद राय यादव समुदाय से हैं. यह बिहार की सबसे बड़ी आबादी वाला पिछड़ा वर्ग है. दिलीप जायसवाल कलवार और संजीव चौरसिया वैश्य समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं.
बीजेपी का प्लान
बीजेपी को पता है कि नीतीश कुमार के जाने के बाद उनके लव-कुश समीकरण और अति-पिछड़ा वोटबैंक को अपनी ओर खींचना जरूरी है. इसी से पार्टी का विस्तार हो पाएगा. अगर पार्टी किसी सवर्ण को मुख्यमंत्री बनाती है, तो विपक्षी दल इसे पिछड़ा विरोधी बताकर मुद्दा बना सकते हैं. इसीलिए, बीजेपी अपनी सवर्ण पार्टी वाली छवि को तोड़कर पिछड़ों और अति-पिछड़ों के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है.
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नीतीश की कमी कैसे होगी पूरी
नीतीश कुमार के रहते बीजेपी को कभी भी पिछड़ा वर्ग के नेतृत्व की चिंता नहीं करनी पड़ी, क्योंकि नीतीश खुद ओबीसी का बड़ा चेहरा थे. अब उनके जाने के बाद, बीजेपी को एक ऐसा चेहरा चाहिए जो नीतीश की कमी को पूरा कर सके और आने वाले चुनाव में एनडीए के समीकरण को अटूट बनाए रखे. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इन चार नामों में से किसे ताज पहनाती है या फिर हमेशा की तरह कोई पांचवां सरप्राइज नाम सामने आता है.
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