Petrol-Diesel Price Hike: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब बिहार के लोगों की जेब पर भी साफ दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम एक बार फिर बढ़ा दिए गए हैं. इस बार पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है. लगातार बढ़ती कीमतों से आम लोगों की चिंता बढ़ गई है.
पटना में पेट्रोल 111 रुपए के पार
पटना में अब पेट्रोल की कीमत 110.16 रुपए से बढ़कर 111.11 रुपए प्रति लीटर हो गई है. वहीं डीजल के दाम 96.19 रुपए से बढ़कर 97.14 रुपए प्रति लीटर पहुंच गए हैं. बीते 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए हैं. इससे पहले मंगलवार को भी कीमतों में इजाफा किया गया था.
आम जनता पर बढ़ा बोझ
लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने आम लोगों के बजट को झटका दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आने वाले दिनों में परिवहन लागत बढ़ेगी और इसका असर रोजमर्रा की चीजों पर भी पड़ेगा. सब्जियों, फलों, राशन और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं. वहीं बस, ऑटो और स्कूल वाहनों का किराया भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
किसानों की लागत भी बढ़ेगी
डीजल की कीमत बढ़ने का सीधा असर खेती-किसानी पर भी पड़ने वाला है. ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और कृषि मशीनों को चलाने में किसानों का खर्च बढ़ेगा. इससे फसल उत्पादन की लागत बढ़ सकती है और अनाज महंगा हो सकता है.
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है. अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद क्रूड ऑयल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई है.
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है. कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए ईंधन कीमतों में लगातार इजाफा कर रही हैं. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल और महंगे हो सकते हैं.
कैसे तय होती है कीमत?
देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की दर और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर तय होती हैं. तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे नई कीमतें जारी करती हैं.
- कच्चे तेल की कीमत
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल जितना महंगा होगा, देश में ईंधन उतना महंगा होगा.
- रिफाइनिंग और कंपनियों का खर्च
कच्चे तेल को रिफाइनरी में साफ कर पेट्रोल और डीजल तैयार किया जाता है. इसमें कंपनियों की प्रोसेसिंग लागत और मुनाफा भी जुड़ता है.
- केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
रिफाइनिंग के बाद केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी और रोड सेस लगाती है. यह पूरे देश में समान होता है.
- डीलर कमीशन
पेट्रोल पंप संचालकों को भी प्रति लीटर एक निश्चित कमीशन दिया जाता है, जो अंतिम कीमत में जुड़ता है.
- राज्य सरकार का VAT
सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या सेल्स टैक्स लगाती हैं. इसी वजह से हर राज्य और शहर में पेट्रोल-डीजल की कीमत अलग-अलग होती है.
आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम
जानकारों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में और इजाफा हो सकता है. ऐसे में महंगाई का असर आम लोगों के साथ-साथ व्यापार और खेती पर भी गहराने की आशंका है.
