Bihar Flood : पटना में बाढ़ की मार झेल रहे गंगा किनारे बसे परिवारों की जिंदगी मुश्किलों से गुजर रही है. घर और खेत पानी में डूबने के बाद कई परिवार गंगा के दूसरी ओर सुरक्षित जगहों पर पहुंचकर प्लास्टिक और कपड़ों से अस्थायी आशियाना बनाकर रहने को मजबूर हैं. इन परिवारों का कहना है कि बाढ़ के दौरान रहने, खाने और मवेशियों के चारे की समस्या बढ़ जाती है, लेकिन प्रशासन की ओर से स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है.
बाढ़ आते ही बदल जाती है पूरी जिंदगी
गंगा किनारे रहने वाले लोगों ने बताया कि उनका जीवन हर साल पानी के साथ बदल जाता है. जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है तो उन्हें अपना घर छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ता है. पानी कम होने के बाद वे फिर अपने पुराने इलाके में लौट जाते हैं. कई परिवारों के पास रहने के लिए अपनी जमीन तक नहीं है.
राशन को लेकर भी लोगों ने बताई परेशानी
वीडियो में बाढ़ प्रभावित लोगों ने राशन व्यवस्था को लेकर भी शिकायत की. उनका कहना है कि उन्हें सामान्य दिनों में मिलने वाला राशन तो मिलता है, लेकिन बाढ़ के कारण घर और खेत डूब जाने के बावजूद अतिरिक्त मदद नहीं मिल रही है. लोगों ने सवाल उठाया कि आपदा के समय उनके लिए अलग से क्या व्यवस्था की जा रही है.
'पढ़ना चाहती हूं, लेकिन मौका नहीं मिलता'
कोमल ने बातचीत में पढ़ाई करने की इच्छा जताई. उसके परिजनों ने बताया कि कभी वे गंगा के एक तरफ रहते हैं तो बाढ़ के समय दूसरी तरफ आ जाते हैं. इस लगातार विस्थापन के बीच बच्चों की पढ़ाई नियमित नहीं हो पाती. स्थानीय लोगों ने शिक्षा की सुविधा उनके नजदीक उपलब्ध कराने की मांग की है.
'वोट देते हैं, लेकिन सुविधा नहीं मिलती'
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे मतदान करते हैं और उनके पास आधार कार्ड व अन्य जरूरी दस्तावेज भी हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बाढ़ से बचाव, आवास, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं का स्थायी समाधान नहीं मिल पा रहा है. लोगों ने कहा कि चुनाव के समय उनकी जरूरतें याद आती हैं, लेकिन बाढ़ के समय उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता.