Patna Flood Affect : पटना के फतुहा प्रखंड के सुकुरपुर गांव में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है. ग्रामीणों के मुताबिक गंगा और पुनपुन नदी के बढ़े जलस्तर ने इलाके की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गांव की सड़कों और आसपास के इलाकों में कमर से लेकर छाती तक पानी बह रहा है. तेज बहाव के बीच लोगों को जरूरी काम के लिए पानी के अंदर से ही गुजरना पड़ रहा है.
10 से 12 हजार की आबादी पर बाढ़ की मार
सुकुरपुर और आसपास के इलाके में करीब 800 से 1000 घर बताए जा रहे हैं, जिनमें रहने वाली करीब 10 से 12 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित है. अधिकांश घरों के ग्राउंड फ्लोर में पानी भर गया है. ऐसे में परिवारों ने छतों को ही अपना ठिकाना बना लिया है. वहीं, जिन लोगों के घर पूरी तरह डूब गए हैं, उन्हें दूसरे परिवार अपनी छतों पर जगह दे रहे हैं. बाढ़ के कारण इलाके के स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
राशन खत्म, चूड़ा-सत्तू खाकर गुजर रहा परिवार
बाढ़ के बीच सबसे बड़ी समस्या भोजन की है. ग्रामीणों का कहना है कि घरों में रखा राशन खत्म हो चुका है. कई परिवार सूखा चूड़ा और सत्तू खाकर किसी तरह दिन काट रहे हैं. बच्चों के लिए भी पर्याप्त भोजन और पोषण की व्यवस्था नहीं है.
पुनपुन में गंगा के उफान का असर, बकरचक की सड़क नदी में समाई; आवागमन पर संकट
ग्रामीणों के मुताबिक कई बार परिवारों को रात में भूखे पेट सोना पड़ रहा है. जिन घरों में पशु बचे हैं, उनके दूध के सहारे बच्चों का पेट भरने की कोशिश की जा रही है.
इंसानों के साथ पशुओं के लिए भी चारे का संकट
बाढ़ का असर सिर्फ लोगों पर नहीं, बल्कि पालतू पशुओं पर भी पड़ा है. पानी बढ़ने के बाद पशुओं को रखने के लिए सुरक्षित जगह नहीं बची है. वहीं, चारे की व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है. इससे ग्रामीणों के सामने अपने पशुधन को बचाने की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.
मदद नहीं पहुंचने का ग्रामीणों का आरोप, नेताओं से नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से राहत पहुंचाने के दावों के बावजूद जमीन पर उन्हें पर्याप्त राशन, नाव या दूसरी जरूरी मदद नहीं मिल रही है. लोग छाती तक पानी में उतरकर आवागमन करने को मजबूर हैं.
स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों को लेकर भी नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि आपदा के इस दौर में उन्हें देखने वाला कोई नहीं है और नेता सिर्फ चुनाव के समय नजर आते हैं. ग्रामीण तत्काल नाव, भोजन, राशन और राहत सामग्री की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं. प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही राहत व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी.