Bihar News: बिहार में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बिजली विभाग के एग्जक्यूटिव इंजीनियर मनोज कुमार रजक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. टीम ने एक साथ उनके 7 ठिकानों पर छापेमारी की. EOU की 6 टीमों ने मधुबनी, दरभंगा, सुपौल (निर्मली और करजाइन) और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक साथ रेड की. इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है.
8 घंटे चली छापेमारी, करोड़ों के कागजात बरामद
करीब 8 घंटे तक चली छापेमारी में बड़ी मात्रा में संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिले हैं. शुरुआती जांच में करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ है. मनोज कुमार रजक ने 2009 में असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में नौकरी शुरू की थी. वर्तमान में वह नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में एग्जक्यूटिव इंजीनियर हैं. पिछले दो वर्षों से उनकी पोस्टिंग मधुबनी के जयनगर में थी.
कई शहरों में फैला संपत्ति का नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि उन्होंने अलग-अलग जगहों पर संपत्ति बना रखी है. सुपौल के करजाइन में तीन मकान और एक गोदाम, निर्मली में एक गोदाम और दरभंगा में एक आलीशान मकान मिला है. EOU को दार्जिलिंग में चाय बागान में पार्टनरशिप के डॉक्युमेंट्स भी मिले हैं. इससे उनके निवेश के दायरे का पता चलता है.
परिवार के नाम पर कारोबार
जांच में यह भी सामने आया है कि उन्होंने अपने भाई संजय रजक के नाम पर सुपौल में गैस एजेंसी खुलवाई थी. बाद में इससे जुड़ी जमीन अपने नाम ट्रांसफर कर ली गई. वहीं पत्नी वीणाश्री के नाम पर दरभंगा-बिरौल रोड पर पेट्रोल पंप के लिए जमीन लीज पर ली गई थी.
निजी जिंदगी को लेकर भी खुलासे
छापेमारी के दौरान उनकी निजी जिंदगी से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए. बताया गया कि उन्होंने पत्नी के रहते एक रिश्तेदार महिला से शादी कर ली थी. जांच में यह भी पता चला कि उस महिला के लिए नेपाल के सुनसारी जिले में एक आलीशान मकान बनवाया जा रहा था. निर्माण के लिए मजदूर अपने गांव से भेजे जाते थे.
भाई भी केस में सह-अभियुक्त
EOU ने इस मामले में उनके भाई संजय रजक को भी सह-अभियुक्त बनाया है. अधिकारियों का कहना है कि आय से अधिक संपत्ति का आंकड़ा और बढ़ सकता है. फिलहाल जमीन, बैंक खातों और निवेश की गहराई से जांच जारी है.
