Waqf Act: 'किसी नेता की औकात नहीं जो BJP के…', मंत्री ने मुस्लिम हितों के संरक्षण पर किया बड़ा दावा

Waqf Act: वक्फ बिल जब पेश हुआ था तब एनडीए में शामिल जदयू ने दोनों सदनों में इसका समर्थन किया था. दोनों सदनों से पास होने और राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद 8 अप्रैल को मोदी सरकार ने इसे लागू कर दिया. जदयू के समर्थन देने के बाद से पार्टी के मुस्लिम नेता नाराज चल रहे हैं.

Waqf Act: जदयू ने वक्फ बिल का राज्यसभा और लोकसभा में समर्थन किया था. लोकसभा में इस बिल के समर्थन में केंद्रीय मंत्री और जदयू सांसद ललन सिंह खूब गरजे थे. 8 अप्रैल को यह कानून लागू भी हो गया लेकिन जदयू के मुस्लिम नेताओं की नाराजगी कम होने का नाम नहीं ले रही है. जदयू के कई नेता इस एक्ट के विरोध में इस्तीफा दे चुके हैं. रविवार को मोतिहारी जिले में एक साथ 15 मुस्लिम नेता ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था. अब इस मुद्दे पर बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने पार्टी का पक्ष रखा है.

अशोक चौधरी बोले- हमने की अल्पसंख्यकों की रक्षा

अशोक चौधरी ने नीतीश कुमार के समर्थन में कहा, “देश के किसी नेता की औकात नहीं है कि बीजेपी के साथ रहकर अल्पसंख्यक के हितों की रक्षा इस तरह कर सके. नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ रहते हुए अल्पसंख्यकों की रक्षा की. 20 वर्षों तक अल्पसंख्यक के लिए काम करके दिखाया है. नीतीश कुमार पर सवाल उठाने वाले अपने गिरेबान में झांक कर देखें. हम लोगों को किसी मौलाना की जरूरत नहीं. हम लोग जनता के लिए काम करते हैं. जनता को अच्छा लगेगा कि हम लोग उनके लिए काम कर रहे हैं तो वोट करेगी.”

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राजद ने अशोक चौधरी पर किया पलटवार

अशोक चौधरी के बयान पर राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा, “जेडीयू कोटे के मंत्री अशोक चौधरी ने बयान देकर खुद स्वीकार कर लिया है कि उनकी सहयोगी बीजेपी मुस्लिम हितों की रक्षा नहीं करती है. अब इससे साफ है कि सीएम की कुर्सी पर बने रहने के लिए नीतीश कुमार बीजेपी के साथ हैं. एजाज अहमद ने आगे कहा कि अशोक चौधरी यह भी कह रहे हैं कि हम लोगों को मौलाना की जरूरत नहीं. इसका मतलब वह मुस्लिमों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं. जब मौलानाओं की जरूरत नहीं तो कल फिर क्यों ईद मिलन कार्यक्रम में टोपी और साफा पहन कर गए थे?”

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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