सारण, सीतामढ़ी से अररिया तक, इन 13 जिलों के विधायकों को नहीं मिली सम्राट कैबिनेट में जगह

Bihar Cabinet: सम्राट चौधरी की नई बिहार कैबिनेट में सामाजिक संतुलन और राजनीतिक रणनीति साफ दिखी, लेकिन 13 जिलों को एक भी मंत्री पद नहीं मिला. पिछड़े, अति पिछड़े और दलित वर्ग को बड़ा प्रतिनिधित्व दिया गया. विभागों के बंटवारे में भाजपा ज्यादा ताकतवर नजर आ रही है.

Bihar Cabinet: बिहार में 7 मई को सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नई सरकार अब पूरी ताकत के साथ काम में जुट गई है. इस विस्तार में सामाजिक समीकरण, जातीय संतुलन और राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखकर मंत्रियों का चयन किया गया. कई जिलों के लिए यह विस्तार झटका भी साबित हुआ. बिहार के 13 ऐसे जिले हैं, जहां से एक भी विधायक को मंत्री पद नहीं मिला.

इन 13 जिलों को नहीं मिला प्रतिनिधित्व

नई कैबिनेट में सारण, शेखपुरा, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, बक्सर, सीवान, बांका, खगड़िया, कटिहार, अररिया, सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारण जिलों से किसी भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया. इनमें से कई जिलों में एनडीए का प्रदर्शन मजबूत रहने के बावजूद प्रतिनिधित्व नहीं मिला.

2025 चुनाव में मिथिलांचल एनडीए के लिए सबसे मजबूत क्षेत्र बनकर उभरा. यहां 46 में से 40 सीटों पर एनडीए ने जीत दर्ज की. पिछले चुनाव ने इस क्षेत्र में एनडीए को महज 30 सीटें मिली थी. तिरहुत क्षेत्र की 64 सीटों में से 55 पर एनडीए का कब्जा रहा. यह 2020 के मुकाबले 19 सीट अधिक है. अंग क्षेत्र में भी एनडीए ने 25 में से 24 सीट जीतकर लगभग पूरा दबदबा कायम रखा.

नई कैबिनेट में पिछड़े, अति पिछड़े और दलित वर्ग का दबदबा

सम्राट चौधरी, विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव समेत कुल 35 मंत्रियों वाली नई सरकार में सामाजिक संतुलन पर खास जोर दिया गया है. 70 प्रतिशत से ज्यादा मंत्री पिछड़े, अति पिछड़े और दलित वर्ग से हैं. आंकड़ों के मुताबिक 11 मंत्री ओबीसी, 7 अति पिछड़ा और 7 दलित वर्ग से हैं. वहीं 9 सवर्ण और एक मुस्लिम चेहरे को भी जगह दी गई है. जदयू के जमा खान इस कैबिनेट के अकेले मुस्लिम मंत्री हैं.

सत्ता के साथ पैसा और पावर बीजेपी के पास ज्यादा

नई सरकार में विभागों के बंटवारे ने भी बड़ा संदेश दिया है. भाजपा के पास 26 विभाग गए हैं, जबकि जदयू के हिस्से 20 विभाग आए हैं. इससे साफ माना जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन के साथ सरकार का बड़ा नियंत्रण भाजपा के पास शिफ्ट हुआ है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गृह, कार्मिक, मंत्रिमंडल सचिवालय और सिविल विमानन जैसे ताकतवर विभाग अपने पास रखे हैं.

इस बार शिक्षा विभाग भाजपा के पास चला गया. इसे बिहार सरकार के सबसे बड़े बजट वाले विभागों में माना जाता है. उद्योग और रोजगार से जुड़े अहम विभाग भी भाजपा ने अपने पास रखे हैं. स्वास्थ्य, ऊर्जा और ग्रामीण विकास जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग जदयू के पास हैं, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक ताकत के लिहाज से भाजपा ज्यादा मजबूत दिख रही है.

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पहली बार मंत्री बने नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी

नई कैबिनेट में कई नए चेहरों को बड़े विभाग देकर भाजपा और जदयू ने बड़ा संकेत दिया है. पहली बार मंत्री बने निशांत कुमार को स्वास्थ्य विभाग दिया गया है. मिथिलेश तिवारी को शिक्षा, श्रेयसी सिंह को उद्योग और इंजीनियर शैलेंद्र को पथ निर्माण जैसा अहम विभाग सौंपा गया है.

विजय सिन्हा और रामकृपाल के विभाग बदले

विजय सिन्हा और रामकृपाल यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं के विभाग बदले गए हैं. विजय सिन्हा को कृषि और रामकृपाल यादव को सहकारिता विभाग मिला है. जदयू में भी बड़ा फेरबदल करते हुए अशोक चौधरी को खाद्य उपभोक्ता, लेसी सिंह को भवन निर्माण और सुनील कुमार को ग्रामीण कार्य विभाग दिया गया है.

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Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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