बिहार विधानसभा चुनाव 2020: अब राजनीति में नाम के लिए बच गए है ये दल, VIP और RLSP को मिल चुका है राजद से झटका

Parties Contesting In Bihar Election 2020, Bihar Vidhan Sabha Chunav : पटना (राजदेव पांडेय): वीआइपी और रालोसपा को राजद से मिला झटका संयोग है या सियासी रणनीति, इस पर प्रदेश के सियासी गलियारों में बहस जारी है. राजद के झटके के बाद इन दलों को किसी दूसरे बड़े दल मसलन भाजपा और जदयू के एनडीए ने अभी तक सहारा भी नहीं दिया है.

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 5, 2020 10:13 AM

Parties Contesting In Bihar Election 2020, Bihar Vidhan Sabha Chunav : पटना (राजदेव पांडेय): वीआइपी और रालोसपा को राजद से मिला झटका संयोग है या सियासी रणनीति, इस पर प्रदेश के सियासी गलियारों में बहस जारी है. राजद के झटके के बाद इन दलों को किसी दूसरे बड़े दल मसलन भाजपा और जदयू के एनडीए ने अभी तक सहारा भी नहीं दिया है.

राजद की उपेक्षा की शिकार हुई सबसे पहली पार्टी हम सेक्युलर की यह किस्मत है कि जदयू ने विशेष रणनीति के तहत उसे सहारा दिया है. हालांकि, हम सेक्युलर को वहां कितनी राजनीतिक ताकत मिलेगी, अभी इसका पता चलना बाकी है.यही स्थिति रालोसपा व विकासशील इंसान पार्टी की बन रही है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य यह है कि पिछले एक माह के अंदर यूपीए और एनडीए ने कई छोटे दलों को हाशिये पर ला पटका है.

इस चुनाव में स्थापित दोनों गठबंधनों यूपीए और एनडीए ने छोटे दलों की उपेक्षा शुरू कर दी है. अगर किसी को तवज्जो दी भी जा रही है, तो वह दलों की अपनी रणनीति है. दल विशेष के रणनीतिकारों का कहना है कि छोटी -छोटी पार्टियों की महत्वाकांक्षा, किसी भी बदली हुई परिस्थिति में दल-बदल के लिए प्रेरित कर सकती थीं.

पार्टियां मोल-भाव की राजनीति कर सकती थीं. पिछले चुनाव परिणामों के आधार पर बड़े दलों ने माना है कि व्यक्ति आधारित दल अपने गठबंधन के दूसरे घटक दलों के लिए वोट ट्रांसफर कराने में असफल रहे थे. इसकी वजह से छोटे -छोटे दलों को गठबंधनों ने हाशिये पर ला दिया है. जानकारों के मुताबिक हाशिये पर डाली गयी यह छोटी -छोटी पार्टियां चुनाव मैदान में अपनी- अपन तरह से ताकत दिखायेंगी.

बिहार की राजनीति में नाम के लिए अस्तित्व में हैं ये दल
 छोटे दलों का पिछले चुनावों में प्रदर्शन
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  • वीआइपी और रालोसपा को राजद से मिला झटका

  • वंचित समाज इंसाफ पार्टी-सात सीटें, 0.01%

  • हम सेक्युलर – केवल एक सीट मिली, 2.27%

  • बहुजन लोक समता पार्टी-दो सीटों पर चुनाव जीती, 2.56%

  • जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक 1.35%

  • सर्वजन कल्याण लोकतांत्रिक पार्टी 0.29%

  • गरीब जनता दल 0.24%

  • बहुजन मुक्ति पार्टी 0.18%

  • ऑल इंडिया फार्वड ब्लॉक. यह कभी वाम दलों का सहयोगी दल था

  • इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग

  • नेशनल पीपुल पार्टी

  • शोषित समाजवादी पार्टी

एक समाजवादी सिद्धांतों वाला दल था, जिसने इस साल भी राजद से एक सीट चाही थी. इस पार्टी ने प्रदेश को एक मुख्यमंत्री भी दिया है.

एक्सपर्ट व्यू

किसी प्रदेश के विकास के लिए जरूरी है कि वहां समान विचारधारा या किसी मजबूत दल की सरकार हो, जो अपनी नीतियों के प्रति प्रतिबद्ध हो. छोटे दल अक्सर किसी मकसद को लेकर सरकार संचालन में बाधा पैदा करते हैं. मोल -भाव करते हैं. इससे अंतत: नुकसान आम आदमी का होता है. इसलिए बहुत छोटे छोटे दल लोकतांत्रिक संसदीय सिस्टम के लिए अच्छा नहीं माने जाते हैं. विकास के लिए जरूरी है कि न केवल सत्ताधारी दल मजबूत हो,बल्कि विपक्ष भी उतना ही शक्तिशाली होना चाहिए.

प्रो शशि शर्मा, डीन मानविकी पटना विश्वविद्यालय

Posted by : Sumit Kumar Verma

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