जमीन और मकान दान देने वालों के नाम पर रहेगा आंगनबाड़ी केंद्र , जिला स्तर पर समिति गठित, क्या है शर्त

Bihar Anganwadi Centres: बिहार में अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपना भवन नहीं है. इसे देखते हुए समाज कल्याण विभाग ने नया फैसला लिया है. विभाग नए साल में आम लोगों से जमीन या मकान दान देने की अपील करेगा, ताकि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को स्थायी भवन मिल सके.

Bihar Anganwadi Centres: बिहार में करीब एक लाख 14 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है, जिसमें लगभग 80 हजार केंद्रों के पास अपना भवन नहीं है.समाज कल्याण विभाग नये साल में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को अपना भवन दिलाने के लिए आमलोगों से जमीन और मकान दान देने करने की अपील करेगा. इस निर्णय को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए हर जिले में अधिकारी गांव-गांव में अभियान चलायेंगे, ताकि लोगों को मालूम हो सकें कि वह जमीन किस तरह से दान में दे सकते हैं. दान देने वाले लोग अनुमंडल पदाधिकारी के पास आवेदन कर सकते है.

जमीन देने वाले अपने परिवार के नाम पर केंद्र का नाम रख सकेंगे

विभाग ने तय किया है कि अगर कोई व्यक्ति केंद्र के लिए जमीन या मकान दान में देता है, तो उस केंद्र का नाम वह अपने किसी भी परिवार के सदस्य के नाम पर रख सकता है. लेकिन विभाग ने इसको लेकर कुछ नियम बनाये है जिसमें कहा गया है कि किसी भी आपराधिक छवि या आपराधिक चरित्र वाले व्यक्ति के नाम पर केंद्र का नाम नहीं रहेगा. दान करने वाले व्यक्ति और उनके परिवार की स्थिति जांचने के लिये जिला स्तर पर समिति का गठन किया गया

एक लाख 14 हजार हजार केंद्र स्वीकृत है

विभाग के मुताबिक एक लाख 14 हजार आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत है. जिसमें से 2700 केंद्र के पास अपना भवन है 4010 केंद्र स्कूल में चल रहे है. वहीं, 80 हजार से अधिक केंद्र किराये के मकान में है. साथ ही, राज्य भर में कई ऐसे केंद्र है, जो स्कूल परिसर में चल रहे हैं.

जिला स्तर पर गठित की गयी समिति

योजनाओं के लिए जमीन,भवन की उपयुक्तता पर अंतिम निर्णय लेने के लिए जिला स्तर पर समिति का गठन किया गया है. जिसमें डीएम अध्यक्ष, अनुमंडल पदाधिकारी सदस्य, कार्यपालक अभियंता भवन निर्माण विभाग सदस्य,जिला प्रोग्राम पदाधिकारी सदस्य सचिव रहेंगे. समिति समय-समय पर बैठक करके निर्णय लेगी.

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शर्त के बारे में जानिए

  • इस योजना के तहत केवल भूमि दान की सकती है या भूमि के साथ उसपर बना भवन भी दान किया जा सकता है.
  • आंगाबनाड़ी केंद्र के लिए प्रास्तावित दान की भूमि का न्यूनतम रकबा पंद्रह सौ वर्ग फीट होना चाहिये.
  • भूमि, भवन आंगनबाड़ी केंद्र के पोषक क्षेत्र में स्थित होना चाहिए और केंद्र के लाभार्थियों के लिए आवागमन की दृष्टि से सुविधाजनक होना चाहिए.
  • भूमि, भवन किसी भी प्रकार के विवाद से मुक्त होना चाहिए.
  • उस पोषक क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र के लिये पूर्व से सरकारी भवन बना नहीं होना चाहिए.
  • केंद्र का नामाकरण किसी ऐसे व्यक्ति के नाम पर नहीं किया जायेगा. जिसका आपराधिक इतिहास रहा हो अथवा जिसका चरित्र विवादस्पद रहा हो. इस के लिये संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र मान्य होगा.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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