Bihar News: बिहार सरकार अब इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-वाहन) को तेजी से बढ़ावा देने की तैयारी में जुट गई है. राज्य के सभी शहरी इलाकों में ई-वाहनों के लिए अनुदानित दर पर पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. इसके साथ ही शहरों में चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ाया जाएगा ताकि लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन इस्तेमाल करने में परेशानी न हो.
नगर विकास एवं आवास विभाग इसके लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है. सरकार की योजना है कि शहरों में बनने वाले बड़े अपार्टमेंट, शॉपिंग मॉल, होटल और बहुमंजिला भवनों में ई-चार्जिंग स्टेशन बनाना अनिवार्य किया जाए.
हर शहर में बनेगा ‘सिटी पार्किंग प्लान’
सरकार ने सभी नगर निकायों को सिटी पार्किंग प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है. इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सस्ती दर पर ऑन-स्ट्रीट पार्किंग और चार्जिंग स्टेशन की सुविधा दी जाएगी. सरकार का मानना है कि अगर चार्जिंग और पार्किंग की सुविधा आसान होगी तो लोग पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह ई-वाहनों को ज्यादा अपनाएंगे.
बिल्डिंग बायलॉज में होगा बदलाव
नगर विकास विभाग भवन निर्माण नियम यानी बिल्डिंग बायलॉज में बदलाव करने जा रहा है. नए नियम लागू होने के बाद शहरों में बनने वाले बड़े भवनों में चार्जिंग स्टेशन बनाना जरूरी होगा. इसका असर खास तौर पर बड़े आवासीय परिसरों, अपार्टमेंट और व्यावसायिक भवनों पर पड़ेगा. सरकार चाहती है कि आने वाले समय में हर बड़े भवन में ई-वाहन चार्ज करने की सुविधा उपलब्ध रहे.
पेट्रोल पंपों पर भी लगेंगे ई-चार्जिंग स्टेशन
परिवहन विभाग की अधिसूचना के अनुसार अब नए पेट्रोल पंपों को लाइसेंस देते समय ई-चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. इतना ही नहीं, पुराने पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन को भी अपने परिसर में चार्जिंग स्टेशन लगाने होंगे. सरकार बड़े होटल और हाईवे किनारे बने मोटल्स में भी ई-चार्जिंग स्टेशन शुरू करवाना चाहती है. इसके लिए प्रोत्साहन राशि देने की भी योजना बनाई गई है.
ओला-उबर और रैपिडो को मिला चार साल का टारगेट
सरकार ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी टैक्सी सेवाओं को भी बड़ा लक्ष्य दिया है. नई नीति के अनुसार इन कंपनियों को अगले चार वर्षों में अपने बेड़े का 50 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलना होगा. इसके तहत पहले दो वर्षों में कम से कम 20 प्रतिशत ई-वाहन शामिल करना अनिवार्य होगा. तीन साल पूरे होने तक यह संख्या 40 प्रतिशत और चार साल में 50 प्रतिशत तक पहुंचानी होगी.
अगर कंपनियां इस नियम का पालन नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
प्रदूषण कम करने पर सरकार का फोकस
सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से प्रदूषण कम होगा और लोगों का ईंधन खर्च भी घटेगा. आने वाले वर्षों में बिहार के शहरों में इलेक्ट्रिक वाहन आम नजर आएं, इसी लक्ष्य के साथ सरकार नई व्यवस्था लागू करने जा रही है.
