Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है. इस मुठभेड़ पर उठ रहे सवालों के बीच वर्तमान सम्राट सरकार कुछ अपने नेता, विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों के सीधे निशाने पर आ गई है. विवाद को इतना ज्यादा बढ़ता देख सरकार ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है. इसी सियासी उठापटक के बीच पूर्व सीएम नीतीश कुमार का करीब तीन साल पुराना एक बयान अचानक चर्चा में आ गया है.
अपराधियों का खात्मा कर देना कोई तरीका नहीं- नीतीश कुमार
7 अप्रैल 2023 को नीतीश कुमार ने मीडिया के सामने एनकाउंटर को लेकर एक बड़ा बयान दिया था जो आज के माहौल में बिल्कुल फिट बैठ रहा है. उन्होंने कहा था कि अपराधियों का सफाया करने के नाम पर उन्हें मार देना कोई सही तरीका नहीं है. इसका मतलब तो यह हुआ कि जो भी जेल जाएगा, उसे आप मार देंगे. उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या ऐसा कोई नियम बना हुआ है? सजा तय करने का काम सिर्फ और सिर्फ अदालत का होता है, पुलिस का नहीं.
जेल और इलाज के रास्ते में एनकाउंटर को बताया था दुखद
नीतीश कुमार ने अपने पुराने बयान में कहा था कि अगर किसी को फांसी की सजा भी होती है, तो वह कानून के तहत फांसी पर चढ़ता है. लेकिन किसी को जेल से इलाज के लिए ले जाते समय या किसी और काम से ले जाते समय रास्ते में एनकाउंटर कर देना बेहद दुखद बात है. उन्होंने मांग की थी कि ऐसी घटनाओं पर निश्चित रूप से कड़ा एक्शन लिया जाना चाहिए. उनका मानना था कि कोई जेल में है या बाहर जा रहा है, उसे इस तरह बीच रास्ते में मार देना बिल्कुल गलत और दुखद बात है.
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क्या है पूरा भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?
बिहार के भोजपुर जिले में पुलिस ने एक एनकाउंटर किया था, जिसमें आरोपी भरत तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी. घटना के बाद सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो साक्ष्य वायरल हुए, जिसमें कथित तौर पर सरेंडर करने के बाद भी युवक को गोली मारते हुए देखा गया. इसके बाद पुलिस की थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे और मानवाधिकार उल्लंघन के साथ फर्जी एनकाउंटर के आरोप लगे. चौतरफा सियासी और सामाजिक दबाव के बाद अब बिहार सरकार बैकफुट पर है और मामले की ज्यूडिशियल इंक्वायरी करा रही है.
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