Rajendra Nagar Terminal Codin Cough Syrup : पटना के राजेंद्र नगर रेलवे टर्मिनल पर करीब दो साल पहले लावारिस हालत में मिले 487 बोतल कोडीन कफ सिरप के मामले में अब प्राथमिकी दर्ज की गयी है. रेल पुलिस ने 27 सितंबर 2024 को प्लेटफॉर्म नंबर-4 के फुट ओवरब्रिज की सीढ़ियों के नीचे से तीन बैग और एक झोला बरामद किया था. उस समय सनहा दर्ज कर मामला सुरक्षित रखा गया था. औषधि निरीक्षक की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद 24 अगस्त 2026 को केस दर्ज किया गया.
प्लेटफॉर्म नंबर-4 के नीचे मिले थे तीन बैग और एक झोला
27 सितंबर 2024 को राजेंद्र नगर टर्मिनल के प्लेटफॉर्म संख्या-4 पर रेल पुलिस के जवान गश्त कर रहे थे. इसी दौरान पश्चिमी फुट ओवरब्रिज की सीढ़ी के नीचे उन्हें लावारिस हालत में तीन बैग और एक झोला दिखाई दिया. संदेह होने पर जवानों ने सामान की तलाशी ली.
तलाशी में निकलीं कोडीन कफ सिरप की 487 बोतलें
लावारिस सामान की जांच के दौरान पुलिस को कुल 487 बोतल कफ सिरप मिलीं. सिरप में कोडिन होने के कारण मामले को गंभीरता से लिया गया. बरामदगी के बाद रेल पुलिस ने तत्काल सनहा दर्ज किया और मामले से संबंधित औषधि निरीक्षक को पत्राचार किया.
दो साल तक FIR के बजाय जांच और रिपोर्ट का इंतजार
बरामदगी के समय रेल पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की थी. मामला सनहा के आधार पर सुरक्षित रखा गया और औषधि निरीक्षक से जांच रिपोर्ट मांगी गयी. करीब दो साल बाद 25 मई 2026 को औषधि निरीक्षक ने मामले की जांच कर लिखित रिपोर्ट पुलिस को सौंपी.
रिपोर्ट मिलते ही 24 अगस्त को दर्ज हुआ केस
औषधि निरीक्षक की रिपोर्ट मिलने के बाद राजेंद्र नगर टर्मिनल जीआरपी ने 24 अगस्त 2026 को प्राथमिकी दर्ज की. केस बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम की धारा 30(ए) के तहत दर्ज किया गया है. इसके साथ ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.
सबसे बड़ा सवाल, आखिर बैग स्टेशन पर कौन छोड़ गया
अब जांच के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि 487 बोतल सिरप से भरे बैग और झोला स्टेशन पर कौन छोड़कर गया था. बरामदगी के समय सामान लावारिस था, इसलिए किसी व्यक्ति की तत्काल पहचान नहीं हो सकी थी. करीब दो साल बीत जाने के बाद आरोपित तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.
दो साल बाद CCTV फुटेज मिलना भी मुश्किल
घटना पुरानी होने के कारण जांच में तकनीकी साक्ष्य जुटाना आसान नहीं होगा. घटना के समय का CCTV फुटेज अब उपलब्ध होगा या नहीं, यह भी एक महत्वपूर्ण सवाल है. सामान्य तौर पर लंबे समय तक पुरानी रिकॉर्डिंग सुरक्षित नहीं रहने के कारण पुलिस को अन्य साक्ष्यों और जांच के जरिए सामान रखने वाले व्यक्ति की पहचान करनी होगी.
जांच में आरोपित नहीं मिला तो केस पर क्या असर पड़ेगा
मामले से जुड़े जानकारों के अनुसार, यदि जांच के दौरान बरामदगी से जुड़े किसी व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाती और आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते हैं, तो पुलिस आगे अंतिम रिपोर्ट की प्रक्रिया अपना सकती है. हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मामला निश्चित रूप से एफआरटी होगा, क्योंकि जांच अभी शुरू हुई है.
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