बख्तियारपुर-राजगीर रेल लाइन होगी डबल ट्रैक, पटना सहित 4 जिलों के लिए गुड न्यूज

Bihar Train: नालंदा और राजगीर के लिए 2025 एक ऐतिहासिक साल बनने जा रहा है. 114 साल बाद बख्तियारपुर–राजगीर रेलखंड के दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. इससे पटना समेत चार जिलों की कनेक्टिविटी और विकास को नई गति मिलेगी.

Bihar Train: लंबे इंतजार के बाद बख्तियारपुर-राजगीर रेलखंड का दोहरीकरण की मंजूरी प्रदान की गयी है. रेलवे मंत्रालय ने इसके लिए राशि भी जारी कर दी है. इस रेलखंड के दोहरीकरण का कार्य राजगीर से आगे तिलैया (नवादा) तक होगा. दोहरीकरण से इस इलाके के यात्रियों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी. मालगाड़ियों के परिचालन में भी तेजी आएगी. राजगीर, नालंदा, पटना, नवादा और शेखपुरा जिले के हजारों यात्रियों को इससे लाभ मिलेगा.

1903 में मार्टिन लाइट रेलवे का सफर हुआ था शुरू

बख्तियारपुर-राजगीर रेलखंड का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है. ब्रिटिश काल में सबसे पहले 1903 में मार्टिन लाइट रेलवे कंपनी ने बख्तियारपुर से बिहारशरीफ तक नैरोगेज रेल लाइन बिछाई थी. उस समय यह क्षेत्र कृषि उत्पादों और स्थानीय व्यापार का केंद्र हुआ करता था. रेल लाइन ने व्यापार और लोगों के आवागमन में नई ऊर्जा भरी थी. इसके बाद 1911 में नैरोगेज लाइन को बिहारशरीफ से नालंदा और सिलाव होते हुए राजगीर तक बढ़ाया गया था.

राजगीर उस समय भी धार्मिक, अध्यात्मिक और पर्यटन दृष्टिकोण से उभरता हुआ केंद्र था. सनातन धर्मावलंबियों के साथ बौद्ध धर्म और जैन धर्म के अनुयायी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते थे. रेल संपर्क से यहां के विकास को और गति मिली थी. शुरुआत में यह पूरी रेल लाइन नैरोगेज थी. छोटे भाप इंजनों और हल्के डिब्बों के सहारे इस रेलखंड में गाड़ियां चलती थी. बाद में यात्री की संख्या और व्यापारिक जरूरतें जैसे जैसे बढ़ने लगी, तब इसका विस्तार आवश्यक हो गया.

जगजीवन राम के समय नैरोगेज से बनी ब्रॉड गेज लाइन

आजादी के बाद भारतीय रेल मंत्रालय ने इस रेलखंड के महत्व को समझा. तत्कालीन रेल मंत्री जगजीवन राम के कार्यकाल में 1962 में इस नैरोगेज लाइन को ब्रॉडगेज (1676 मिमी या 5 फीट 6 इंच) में बदल दिया गया. उसी समय राजगीर को गया जी से जोड़ने की योजना बनाई गई थी. डीपीआर भी तैयार किया गया था. इससे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ी और अधिक डिब्बों वाली गाड़ियां इस खंड पर दौड़ने लगीं. पटना से राजगीर और गया से राजगीर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह रेल लाइन बेहद उपयोगी साबित हुई है.

दोहरीकरण से यात्रियों को मिलेगी राहत

समय के साथ इस रूट पर ट्रेनों की संख्या लगातार बढ़ी है. राजगीर न केवल धार्मिक, अध्यात्मिक और ऐतिहासिक नगरी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन, शिक्षा और खेल भूमि भी है. हर साल लाखों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं. दुनिया के दर्जनों देशों के छात्र यहां शिक्षा पाने आते हैं.

यहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेलों का भी आयोजन होने लगा है. इसके अलावा गया और पटना से होकर जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन में भी यह रेलखंड महत्वपूर्ण कड़ी है. एकल लाइन होने की वजह से ट्रेनों के आवागमन में हमेशा बाधा आती रहती है. अक्सर यात्रियों को देरी से चलने वाली गाड़ियों की परेशानी झेलनी पड़ती है. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए रेलवे ने बख्तियारपुर-राजगीर- तिलैया रेलखंड का दोहरीकरण कराने का निर्णय लिया है.

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रेलखंड के दोहरीकरण से विकास को मिलेगी रफ्तार

दोहरीकरण होने के बाद इस मार्ग पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी. परिचालन सुगम होगी. ट्रेन के लेट लतीफी से निजात मिलेगी. माल गाड़ियां भी बिना रुके फर्राटे से दौड़ेंगी. इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा.

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परियोजना नालंदा के पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंच जाएगी. राजगीर, नालंदा और पावापुरी जैसे बौद्ध और जैन तीर्थ स्थलों तक पहुंचना आसान हो जाएगा.

केन्द्रीय कैबिनेट की मुहर लगने और रेलवे द्वारा राशि आवंटित करने के बाद नालंदा और नवादा में खुशी की लहर दौड़ गई है. लंबे समय से लोग इस खंड के दोहरीकरण की मांग करते आ रहे थे. अब यह सपना पूरा होने वाला है.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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