Anant Singh Attacked: अनंत सिंह पर सोनू-मोनू गैंग ने की ताबड़तोड़ 70 राउंड फायरिंग, इलाके में भारी तनाव

Anant Singh Attacked: बाहुबली अनंत सिंह पर मोकामा में सोनू मोनू गैंग ने हमला कर दिया. इस हमले में पूर्व विधायक पर 70 राउंड गोली फायर की गई.

Anant Singh Attacked: पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह पर जानलेवा हमला हुआ है. खबर आ रही है कि मोकामा में उन पर 70 राउंड फायरिंग की गई है. घटनास्थल पर पांच थानों की पुलिस पहुंच गई है. इस हमले में अनंत सिंह बाल-बाल बच गए. अनंत सिंह एक लेन देन विवाद में पंचायत करने मोकामा पहुंचे थे. इस घटने में दो लोग के घायल होने की बात भी कही जा रही है.

सोनू-मोनू ने अपने मैनेजर पर गबन का आरोप लगा घर में लगा दिया था ताला

सोनू-मोनू का ईंट-भट्टा का कारोबार है. इसका मैनेजर हेमजा गांव का मुकेश है. सोनू-मोनू ने मुकेश पर आरोप लगाया कि उसने 65 लाख रुपये का गबन कर लिया है. इसके बाद सोनू-मोनू ने मुकेश के घर में ताला लगा दिया. मुकेश ने इसकी शिकायत अनंत सिंह से की. अनंत ने पहले सोनू-मोनू से बात की, लेकिन इसके बाद भी ताला नहीं खोला. बाद में मुकेश ने पुलिस से शिकायत की और पुलिस ने ताला खुलवाया.

एके-47 से भी चली गोलियां

ताला खुलने के बाद अनंत सिंह पहले मुकेश के घर पर गये. वहां सोनू-मोनू भी था. दोनों के बीच वहीं से विवाद शुरू हुआ. बाद में सभी चले गये. थोड़ी देर बाद ही अनंत व उनके समर्थक 10 गाड़ियों से सोनू-मोनू के घर पहुंच गये. और दोनों ओर से फायरिंग शुरू हो गयी. इसके बाद वहां से अनंत समर्थकों को लेकर छह किलोमीटर दूर हाथीदह चले गये. वहां से दुबारा अनंत सिंह सोनू-मोनू के घर नौरंगा पहुंचे. इसके बाद फिर से दोनों में फायरिंग शुरू हो गयी. ग्रामीणों के अनुसार दोनों गुटों के बीच हुई ताबड़तोड़ फायरिंग में एके-47 से भी गोलियां चली है. हालांकि पुलिस फिलहाल गोलीबारी करने वालों की तलाश कर रही है.

पुलिस छावनी में तब्दील हुआ इलाका

पूर्व विधायक अनंत सिंह आज नौरंगा जलालपुर के दौरे पर थे. घटना के बाद नौरंगा गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है. बाढ़ डीएसपी मौके पर कैंप कर रहे हैं. नौरंगा जलालपुर गांव में एक दबंग के द्वारा एक घर में ताला लगा दिया गया था. इसी को लेकर पूर्व विधायक अनत सिंह गांव पहुचे थे. फिलहाल गांव में भारी तनाव है.

बाढ़ डीएसपी राकेश कुमार ने सोनू-मोनू के घर पर ही फायरिंग की बात स्वीकार की. पुलिस ने मौके से तीन खोखा भी बरामद किया है. इस गोलीबारी में छोटे सरकार भी बाल बाल बच गए हैं. फिलहाल गांव में भारी तनाव है. यहां कई थाने की पुलिस कैंप कर रही है.

घटना के बाद तैनात पुलिस

अनंत सिंह और सोनू-मोनू में बहुत पहले से ही एक दूसरे के जान के दुश्मन हैं. अनंत सिंह जब जेल से रिहा हुए उसके बाद सोनू-मोनू गैंग के साथ उनके रिश्ते में सुधार आया था. लेकिन आज बुधवार शाम एक बार फिर दोनों के बीच वर्चस्व को लेकर गोलीबारी हुई.

16 अगस्त को जेल से बाहर आये अनंत सिंह

अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट ने 14 अगस्त को AK-47 और बुलेट प्रूफ जैकेट मामले में बरी कर दिया था. 16 अगस्त को वो जेल से बाहर आए थे. छोटे सरकार के खिलाफ अब कोई केस पेंडिंग नहीं है. ऐसे में बुधवार शाम को घटी ये घटना उनके राजनीतिक जीवन में एक नया मोड़ ला सकती है. पुलिस के कई टीम सोनू-मोनू की तलाश में जुट गई है. इस घटना से आस पास के इलाके में खौफ का माहौल है. बता दें कि अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी मोकामा से विधायक हैं.

अनंत सिंह

2005 में पहली बार बने थे विधायक

2005 में जदयू के टिकट पर मोकामा से पहली बार विधायक बनकर अनंत सिंह ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी. इसके बाद, 2010 में भी वह जदयू के टिकट पर मोकामा से फिर से जीत दर्ज करने में सफल रहे. 2015 में अनंत सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मोकामा विधानसभा से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. 2015 में उनके पटना स्थित सरकारी मकान में छापेमारी के दौरान कई प्रतिबंधित सामग्रियां बरामद हुई थीं, जिसके बाद उनका नाम कई गंभीर आपराधिक मामलों में आया. इसके बावजूद, 2015 के चुनाव में अनंत सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और जीत हासिल की.

इसके बाद 2020 में भी उन्होंने राजद के टिकट पर चुनाव लड़ा, जबकि वह जेल में बंद थे. फिर भी जीत दर्ज की और मोकामा पर अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखी. हालांकि, 2022 में अनंत सिंह को एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराया गया और उनकी विधायकी चली गई. इसके बाद, उनकी पत्नी ने राजद के टिकट पर उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की.

इसे भी पढ़ें: लालू का ऑफर ठुकरा नीतीश के साथ गए थे अनंत सिंह, लगातार 4 बार मोकामा से विधायक बने छोटे सरकार



प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >