AIIMS Patna: आपातकालीन स्थिति में लोगों की जान बचाने के लिए कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से एम्स पटना के बाल रोग विभाग ने मंगलवार को इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) के सहयोग से 'आईएपी-सीपीआर डे 2026' का आयोजन किया. कार्यक्रम आईएपी के राष्ट्रीय जन-जागरूकता अभियान 'संजीवनी' के तहत एम्स पटना के सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें 300 से अधिक लोगों ने भाग लिया.
कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल की देखरेख में हुआ. इस अवसर पर डीन (एकेडमिक्स) प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, उपनिदेशक (प्रशासन) नीलोत्पल बल समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक और संकाय सदस्य मौजूद रहे.
समय पर दिया गया सीपीआर बचा सकता है जान
प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि अचानक कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में समय पर दिया गया सीपीआर किसी व्यक्ति की जान बचा सकता है. उन्होंने कहा कि यह जीवनरक्षक तकनीक केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हर नागरिक को इसकी जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि आपात स्थिति के शुरुआती कुछ मिनट सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं.
प्रतिभागियों को दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यक्रम में आईएपी-एएलएस/बीएलएस ग्रुप के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. लोकेश, कोर्स समन्वयक एवं प्रशिक्षक डॉ. अरुण प्रसाद तथा प्रशिक्षक डॉ. प्रदीप कुमार ने प्रतिभागियों को सीपीआर की सही तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया. प्रतिभागियों ने सीपीआर मैनिकिन पर चेस्ट कंप्रेशन और पुनर्जीवन की तकनीकों का अभ्यास कर आपात स्थिति में प्रभावी ढंग से सहायता करने की जानकारी हासिल की.
विभिन्न वर्गों के लोगों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम का समन्वय बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं आईएपी बिहार शाखा के प्रेसिडेंट-इलेक्ट डॉ. चंद्र मोहन कुमार ने किया. इसमें एमबीबीएस और नर्सिंग के छात्र-छात्राओं, पैरामेडिकल कर्मियों, प्रशासनिक कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों तथा अन्य कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.
'सीपीआर-रेडी इंडिया' की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
आयोजकों के अनुसार, देशभर में आईएपी-सीपीआर डे 2026 के तहत एक साथ आयोजित कार्यक्रमों में 50 हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया. अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण देकर 'सीपीआर-रेडी इंडिया' की दिशा में जनभागीदारी बढ़ाना है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आम नागरिकों को सीपीआर का बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त हो, तो दुर्घटना अथवा अचानक कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थितियों में मरीज को अस्पताल पहुंचने से पहले ही जीवनरक्षक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है, जिससे उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.
