कबाड़ में फेंका परीक्षार्थियों का वेरिफिकेशन लेटर

पटना : जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) की लापरवाही का खामियाजा नौकरी तलाश रहे हजारों युवाओं को भुगतना पड़ सकता है. पुलिस चालक पद के लिए होनेवाली शारीरिक परीक्षा के लिए यहां से जारी होनेवाली ड्राइविंग लाइसेंस वेरिफिकेशन लेटर को कार्यालय में कबाड़ के बीच फेंक दिया गया है. परीक्षार्थी कबाड़ के बीच से अपना लेटर […]

पटना : जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) की लापरवाही का खामियाजा नौकरी तलाश रहे हजारों युवाओं को भुगतना पड़ सकता है. पुलिस चालक पद के लिए होनेवाली शारीरिक परीक्षा के लिए यहां से जारी होनेवाली ड्राइविंग लाइसेंस वेरिफिकेशन लेटर को कार्यालय में कबाड़ के बीच फेंक दिया गया है.
परीक्षार्थी कबाड़ के बीच से अपना लेटर तलाशने को मजबूर हैं. बिना वेरिफिकेशन लेटर के उन्हें शारीरिक परीक्षा में शामिल नहीं होने दिया जायेगा. लापरवाही की हद यह है कि जब परीक्षार्थी कार्यालय के कर्मियों से वेरिफिकेशन लेटर मांगने जाते हैं, तो उन्हें खुद ही कबाड़ में ढूंढ़ने को कहा जाता है.
शुल्क वसूला, सेवा देने में कोताही : डीएल वेरिफिकेशन के लिए प्रति आवेदन 200 रुपये शुल्क लिया गया है. करीब 20 लाख रुपये वसूले गये हैं. लेकिन, सेवा के नाम पर उन्हें परेशान किया जा रहा है.
वेरिफिकेशन लेटर बांटने के लिए कर्मी तक नियुक्त नहीं किये गये हैं. अव्यवस्था का आलम यह है कि कार्यालय की ओर से जारी वेरिफिकेशन लेटर के साथ अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड फर्स पर बिखरे पड़े हैं. लोग उस पर चढ़ कर आ जा रहे हैं. दिन भर की मेहनत के बाद किसी को लेटर मिल तो जा रहा है. लेकिन, अन्य कागजात गायब पाये जा रहे हैं.
हमारे पास कर्मियों की कमी है. हम स्पेशल कर्मी इसके लिए नियुक्त नहीं कर सकते हैं. रोज के काम के अलावे यह अतिरिक्त काम है. रोजाना लगभग 400 अभ्यर्थियों को इंटरनेट करना पड़ता है, इसके लिए अतिरिक्त कर्मी कहां से लायेंगे.
अजय कुमार ठाकुर, डीटीओ, पटना

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