24 योजनाओं में बिहार को केंद्र सरकार ने नहीं दिये पैसे
पटना : चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 को शुरू हुए दो महीने बीत गये हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक महज 10 योजनाओं में ही पैसा दिया है. इसमें केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) की संख्या पांच ही है. यानी इन योजनाओं को संचालित करने में केंद्र की तरफ से ही पूरा पैसा दिया जायेगा. शेष […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
पटना : चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 को शुरू हुए दो महीने बीत गये हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक महज 10 योजनाओं में ही पैसा दिया है. इसमें केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) की संख्या पांच ही है. यानी इन योजनाओं को संचालित करने में केंद्र की तरफ से ही पूरा पैसा दिया जायेगा. शेष पांच योजनाएं मैचिंग ग्रांट या चेंज्ड शेयरिंग पैटर्नवाली हैं. इन योजनाओं को संचालित करने के लिए राज्य सरकार को अपनी तरफ से हिस्सेदारी देनी पड़ती है. अलग-अलग योजना में यह हिस्सेदारी भिन्न होती है. राज्य का यह मैचिंग ग्रांट 10 से 35 प्रतिशत तक होता है. इस वित्तीय वर्ष में सीएसएस की संख्या 34 हैं, जबकि शेयरिंग पैटर्न वाली योजनाओं की संख्या 20 हैं.
इन योजनाओं को सुचारु ढंग से संचालित करने के लिए केंद्र की तरफ से सभी योजनाओं में करीब 15 प्रतिशत रुपये आवंटित कर देना चाहिए था. योजनावार रुपये भेजने में देरी होने से इसके क्रियान्वयन पर प्रभाव पड़ेगा. योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल सकेगा. साथ ही अगर रुपये मिलने की रफ्तार ऐसी ही बनी रही, तो आनेवाले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हो जायेगी. इसके बाद योजनाओं के क्रियान्वयन में समस्या आ जायेगी.
इन बड़ी योजनाओं में नहीं है फंड
सीएसएस और राज्य की मैचिंग ग्रांट वाली योजनाओं को मिला कर कुल 54 योजनाओं में महज 10 में ही रुपये मिले हैं. दोनों तरह की 44 योजनाओं में केंद्र की तरफ से रुपये नहीं मिले हैं. इसमें 29 सीएसएस और 15 मैचिंग ग्रांट वाली योजनाएं शामिल हैं. कुछ प्रमुख योजनाएं, जिनमें नहीं मिले रुपये वे हैं, ट्रांसफर टू सेंट्रल रोड फंड (सीआरएफ), सेंट्रल फंड से रोड एंड ब्रिज निर्माण योजना, एमपीलैड, एसटी छात्रों के लिए शिक्षा योजना, एससी-एसटी व ओबीसी छात्रवृत्ति योजना, सीमा क्षेत्र विकास योजना (बीएडीपी), इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना, राष्ट्रीय पोषक मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, पशु पालन एवं डेयरी विकास योजना, स्वच्छ भारत अभियान, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान (रूसा), राष्ट्रीय जीविका मिशन आदि.