25 हजार व्रती दे सकेंगे अर्ध्य

वंशी घाट से कृष्णा घाट तक लगभग 500 मीटर की लंबी पट्टी पर छठ की तैयारी पूरी हो चुकी है.

संवाददाता, पटना वंशी घाट से कृष्णा घाट तक लगभग 500 मीटर की लंबी पट्टी पर छठ की तैयारी पूरी हो चुकी है. इसमें पांच पक्के घाट शामिल हैँ जिनमें वंशी घाट और कृष्णा घाट के अलावा काली घाट, कदंब घाट और पटना कॉलेज घाट भी शामिल हैं. इन घाटों पर 25 हजार व्रती अर्ध्य दे सकेंगे. रिवर फ्रंट से जुड़े होने के कारण इन घाटों पर पहुंचना बेहद आसान है. इसके अलावा दरभंगा हाउस के बगल से, काली मंदिर के बगल से और पटना कॉलेज से भी इन घाटों की सीधी कनेक्टिविटी है. इन सबके कारण यहां भीड़भाड़ के दौरान भी छठव्रतियों को आने जाने में मुश्किल नहीं होगी और पहुंचना सुविधाजनक होगा. जेपी सेतु के नीचे तक पहुंच गयी नदी की धारा इन सभी घाटों पर गंगा नदी में पानी की मात्रा घटने से नदी की धारा घाट से पीछे हुई है. इसके कारण नयी उभरी जमीन में अभी भी कीचड़ है और कहीं कहीं यह दलदलनुमा भी है जिसे किनारे पर तैयार कर रखे सैंड बैग से भरा जा रहा है. पानी की धारा पीछे हटने के कारण नदी के भीतर बैरिकेड लगाने के लिए दूरी के निर्धारण में भी यहां घाट ठेकेदार के पसीने छूट रहे हैं. घाटोंं की क्षमता (व्रती अर्घ्य दे सकेंगे)वंशी घाट- तीन हजार काली घाट – चार हजार कदंब घाट- तीन हजार पटना कॉलेज घाट- पांच हजार कृष्णा घाट- 10 हजार बॉक्स मैटर : बरहरवा घाट की दलदली जमीन को चटाई से ढक कर डाला जा रहा बालू कृष्णा घाट से थोड़ी दूर पर स्थित बरहरवा घाट पर दलदली जमीन को पाटना घाट को छठ के लिए तैयार कर रहे ठेकेदार और उसकी निगरानी कर रहे जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गयी है. यहां दलदल की मात्रा इतनी अधिक है कि उसे काटकर निकालने के बावजूद भी वह पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है. पानी घटने के कारण नदी लगातार सिमटती जा रही है. इसके कारण नयी गीली और दलदली भूमि और भी निकलते जा रही है. धूप से सूखकर पूरी तरह ठीक होने में इसे पांच-सात दिन लग जायेेंगे और उतना समय अब बचा नहीं है. लिहाजा अधिक दलदली भूमि को कपचकर निकालने के बाद यहां गीली और दलदली मिट्टी पर चटाई बिछाई जा रही है और उसके ऊपर से बालु डाला जा रहा है ताकि व्रतियों को आने जाने में असुविधा नहीं हो. न तो उनके पैर दलदल में डूबे और न ही कीचड़ से फिसलन का सामना करना पड़े. बांस घाट पर पहुंचा दी गयी बिजली मुख्य सड़क से लगभग दो किमी दूर हाेने के कारण बांसघाट तक बिजली पहुंचाना नगर निगम और पेसू के अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती थी. लेकिन यहां भी शनिवार तक नगर निगम के विद्युत प्रभाग और पेसु के अधिकारियों ने संयुक्त प्रयास करके बिजली के तार पहुंचा दिये है. साथ ही इस रास्ते के पूरे पहुंच पथ पर लाइटिंग की जा रही है औरा हर खंबे पर वेपर लाइट लगाये जा रहे हैं. राजापुर पुल , कलेक्टेरिएट आदि दूर स्थित घाटों पर भी बिजली पहुंचाने और लाइट लगाने का काम अपने अंतिम चरण में है. कलेक्टेरिएट घाट पर कपड़े भी लगाये जाने लगे कलेक्टेरिएट घाट पर बन रहे कंट्रोल रूम , चेंजिंग रूम आदि में कपड़े भी लगा दिये गये हैं. अन्य घाटों में भी अगले एक-दो दिनों में कपड़े लगाने का काम शुरू हो जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >