मौलाना अबुल कलाम आजाद को पुण्यतिथि पर लोगों ने दी श्रद्धांजलि
पटना : मजहब और देश अलग अलग चीजें हैं. मजहब के आधार पर देश नहीं बना सकते. मौलाना अबुल कलाम आजाद की पुण्य तिथि पर आइएमए सभागार में शनिवार को आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में भारतीय स्वाधीनता संघर्ष में उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए जाने माने राजनीतिक चिंतक योगेंद्र यादव ने आगे कहा कि जिन्ना के दो राष्ट्र के सिद्धांत को मौलाना आजाद ने पूरी तरह से नकार दिया. जिन्ना कहते थे कि जहां दो मजहब होगी, वहां दो देश होंगे ही. भारत में हिंदू और मुसलमान दो धर्म हैं तो दोनों के लिए दो देश होना ही चाहिए, लेकिन गांधी और पटेल के साथ मौलाना आजाद ने भी एक सुर में कहा कि ऐसा नहीं होगा. तुमको पाकिस्तान चाहिए तो लो लेकिन हमारे यहां देश धर्म से अलग होगा.
आज 70 साल बाद फिर से धर्म के आधार पर दो देश की बात की जा रही है जो सही नहीं है. मौलाना आजाद से हमें वह आत्मविश्वास लाने की जरूरत है, जिसके बल पर 70 साल पहले हमने कहा था कि हम यूरोप की नकल नहीं करेंगे, जिसमें धर्म के आधार पर देश की बात की जा रही है.
हम धर्मनिरपेक्ष हैं. उन्होंने आगे कहा कि नेता को जात बिरादरी में बंद करने से बचना चाहिए और वर्तमान समय में उनके विचारों की प्रासंगिकता पर बल देना चाहिए. मौलाना आजाद जैसे महान पुरुषों को श्रद्धांजलि देने का सही तरीका है कि हम सोचें कि आज के दौर में वे होते तो क्या करते, वही काम हम खुद करने का प्रयास करें. एनआरसी को अनावश्यक करार देते हुए उन्होंने कहा कि पहले से वोटर कार्ड, आधार कार्ड है.
ऐसे में एक नये कार्ड पर 60-70 हजार करोड़ खर्च करना सही नहीं है. इससे बेहतर होता कि बेरोजगारों का रजिस्टर तैयार किया जाता जो 500 करोड़ में ही काम हो जाता. उन्होंने कहा कि एनआरसी से बचने का एक तरीका एनपीआर का बहिष्कार है. इस अवसर पर दिल्ली विवि के प्रो नइमुद्दीन, समाजसेवी व शिक्षाविद डॉ विजय कुमार सिंह, परवेज अहमद समेत कई अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखें और मौलाना आजाद को श्रद्धांजलि दी.
